गोकुलपुर गांव में बनी झुग्गियों में शनिवार देर रात हुए हादसे में सात लोगों की जान चली गई। आखिर किसकी लापरवाही की वजह से यह हादसा हुआ। पुलिस ने पूरे घटना स्थल को जांच होने तक के लिए सील कर रखा है। क्राइम टीम के अलावा रोहिणी एफएसएल की टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाएं हैं।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि सभी झुग्गियों में अवैध रूप से कटिया डालकर बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा था। झुग्गियों में बेहद पतले-पतले तारों से बिजली आ रही थी। आशंका है कि इन तारों में चिंगारी या शार्ट सर्किट के कारण आग लगी।
उत्तर-पूर्वी जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त देवेश कुमार ने बताया कि फिलहाल हादसे के दोषियों की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल है। झुग्गियों में बिजली के मीटर लगे थे या नहीं या वह बिजली का इस्तेमाल कैसे कर रहे थे? इसकी जांच की जा रही है। जिन प्लॉटों में झुग्गियां बसी हुई थीं, उनके मालिकों का पता किया जा रहा है। दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग और नगर निगम को इस संबंध में पत्र लिखे हैं। जिम्मेदारी तय करने के बाद निश्चित आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जाएगा।
मौके पर अर्द्धसैनिक बल तैनात
सूत्रों का कहना है कि अमरपाल और मोनू पंडित नामक लोगों के दोनों प्लॉट हैं। यह लोग झुग्गीवासियों से हर माह 1200 से 1500 रुपये किराया लेते थे। अधिकारी ने बताया कि फिलहाल जांच और कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए मौके पर लोकल पुलिस के अलावा अर्द्धसैनिक बल तैनात किया गया है। जांच की प्रक्रिया और मीडिया की पूछताछ से पीड़ित परिवारों को बचाने के लिए फिलहाल उन्हें ज्योति नगर की एक धर्मशाला में शिफ्ट किया गया है।
हालांकि, इन्हें वहां से शिफ्ट किए जाने के बाद कुछ रिश्तेदारों ने इस पर ऐतराज भी जताया। उनका आरोप था कि अब रिश्तेदारों को भी पीड़ित परिवारों से मिलने नहीं दिया जा रहा है। दूसरी ओर हादसे में जो परिवार हताहत हुए हैं उनका कहना था कि उनके पास महज एक जोड़ी कपड़े ही बचे हैं, बाकी सामान जल गया है। अब इन परिवारों को अपने भविष्य की चिंता सता रही है। हालांकि, रविवार को कुछ लोग पीड़ित परिवारों की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने खाने-पीने का सामान और कुछ ने कपड़े दिए।
ये था मामला
गोकुलपुर गांव के पास मेट्रो पिलर नंबर-12 के बाद बसी झुग्गियों में शुक्रवार रात आग लग गई है। हादसे में एक परिवार के पांच लोगों व दो मासूम बहन-भाई समेत कुल सात लोगों की जान चली गई थी। आग में 33 झुग्गियां जल गईं। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री समेत कई लोगों ने दुख प्रकट करते हुए पीड़ितों का ढाढ़स बंधाया था।