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एसआरसीसी ने दाखिला नहीं दिया तो मुख्यमंत्री बनकर आना पड़ा : रेखा गुप्ता

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एसआरसीसी ने दाखिला नहीं दिया तो मुख्यमंत्री बनकर आना पड़ा : रेखा गुप्ता
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-मुख्यमंत्री ने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के वार्षिक समारोह को किया संबोधित

- साथ ही कहा कि आसुरी शक्ति से डरने वाली नहीं, दिल्ली की जनता मेरी सबसे बड़ी ताकत

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के 99वें वार्षिक समारोह में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि जब भी वह विश्वविद्यालय परिसर में लौटती हैं, तो उम्र और पद का फासला मिट जाता है। वही पुराना विद्यार्थी जीवन फिर से जीवंत हो उठता है। वर्ष 1993 में एसआरसीसी में दाखिला लेना चाहती थीं। लेकिन उच्च प्रतिशत के कारण दाखिला नहीं मिल सका। शायद मुझे यहां आने के लिए मुख्यमंत्री बनना पड़ा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने कॉलेज जीवन के अनुभव भी छात्रों से साझा किए। छात्र राजनीति के दिनों की एक मार्मिक घटना को लेकर बताया कि जब वह दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) की अध्यक्ष थीं। उस समय एक प्रदर्शन के दौरान हुए हादसे में उनका चेहरा बुरी तरह झुलस गया था। लगभग डेढ़ महीने तक उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा, उस समय दर्द तो था, कठिनाइयां भी थीं। लेकिन हार नहीं मानी।
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कठिनाइयां हमें रोक नहीं सकती

कॉलेज जीवन ने मुझे यही सिखाया कि कठिनाइयां हमें रोक नहीं सकतीं। हमें हर हाल में आगे बढ़ना चाहिए। कठिनाइयां चाहे कितनी भी हों हमें रुकना नहीं चाहिए। कॉलेज जीवन ही वह दौर होता है, जब दोस्ती, संबंध और यादें ताउम्र साथ रहती हैं। कॉलेज की लाइब्रेरी, कैंटीन की चर्चाएं, प्रोफेसरों से संवाद और सहपाठियों के साथ बिताए पल यही मेरी जिंदगी की असली पूंजी हैं। यही अनुभव मुझे नेतृत्व की ओर ले गए। आज मुझे देश व समाज की सेवा करने की प्रेरणा देते हैं।

छात्र अनुभवों से भविष्य का मार्ग करें तय

मुख्यमंत्री ने छात्रों से कहा कि कॉलेज जीवन को केवल बीती यादों के रूप में न देखें बल्कि इन्हीं अनुभवों से भविष्य का मार्ग तय करें। आपके जीवन का हर अनुभव, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, आपकी आगे की यात्रा को आकार देता है। छात्र जीवन में सीखी गई बातें ही आपको नेतृत्व, संवेदनशीलता और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का साहस देती हैं।
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दिल्ली को बनाएंगे विश्वस्तरीय शैक्षणिक हब
रेखा गुप्ता ने कहा कि अपने ऊपर हुए हमले के बावजूद उनकी हिम्मत और संकल्प पहले से और मजबूत हुआ है। मुझे तूफान से लड़ने की आदत है और आसुरी शक्ति से डरने वाली नहीं हैं। दिल्ली की जनता मेरी सबसे बड़ी ताकत है। किसी भी ताकत से डरकर रुकने वाली नहीं हूं। देश की राजधानी दिल्ली को विश्वस्तरीय शैक्षणिक हब बनाना उनकी प्राथमिकता है।
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