डॉ. वाधवा के अनुसार, सभी संज्ञा का अपना एक नंबर होता है। जब हमने कोरोना वायरस के अक्षरों और संज्ञा के अंकों का अध्ययन किया तो ये योग दो आता है। साल में दो बार अंक दो आना और कोरोना वायरस का अंक भी दो होना, यह मिलकर ज्यादा बड़ी परेशानी खड़ी करते हैं।
हालांकि भारत का योग तीन है। इसिलए ऐसी उम्मीद की जा रही है कि भारत इसे नियंत्रित करने में सफल हो जाएगा। क्योंकि तीन को बृहस्पति (गुरु) का साइन माना जाता है। इसे सबसे बड़ा ग्रह मानते हैं। साथ ही इसमें बहुत गर्मी भी है।
इसलिए माना जाता रहा है कि चंद्र के प्रभाव को कम करने में भारत सक्षम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच अप्रैल की रात नौ बजे नौ मिनट दीया जलाने के फैसले को लेकर डॉ. वाधवा कहती हैं, न्यूमोरोलॉजी के अनुसार देखें तो नौ को वॉरियर का नंबर माना जाता है।
इस पर मंगल का प्रभाव होता है। आमतौर इन्हें विजय भी मिलती है। पीएम मोदी ने इसीलिए नौ को दो बार नौ बजे नौ मिनट का आह्वान किया। इसमें जीत की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इसी तरह लाइट बंद कराने के पीछे भी एक बड़ा तर्क है।
विद्युत के सामान में राहु वा वास रहता है। साथ ही अंधेरे में भी। लेकिन पीएम ने जब दरवाजे पर दीया जलाने को कहा तो इसका मतलब ये था कि वो घर से राहु को निकालकर दरवाजे के बाहर कराना चाहते हैं। आग असल में पूरी परिस्थिति को बदल देती है।
इतना ही नहीं उन्होंने 21 दिन के लॉकडाउन के नंबर्स को लेकर भी कहा कि इनका योग तीन आता है। तीन भारत के लिए सबसे उचित स्थिति होती है, क्योंकि खुद भारत के अक्षरों का योग तीन है। तीन दुनिया के सबसे बड़े प्लेनेट को इंडिकेट करता है।
ऐसे में पीएम ने 21 दिनों का आह्वान किया होगा। क्योंकि कोरोना से लड़ने के लिए यही नंबर सबसे मुफीद हो सकता था। साथ ही एक वैज्ञानिक मान्यता है कि किसी भी शख्स को किसी नई आदत को डालने के लिए कम से कम 21 दिनों तक नियमित उस काम को करना चाहिए।
मुझे इसका कारण नहीं पता, वे ऐसा क्यों मानते हैं। लेकिन बतौर न्यूमोरोलॉजिस्ट मैं इस तथ्य के आधार पर मैं ये कह सकती हूं कि 21 दिन वाला फैसला लेकर पीएम लोगों को घरों में रहने की आदत डलवा देंगे।