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29 अस्पतालों में वेंटिलेटर बेड भरे

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नई दिल्ली। राजधानी में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के कारण गंभीर मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। नतीजतन, अस्पतालों में वेंटिलेटर बेड भी भर रहे हैं। स्थिति ये है कि दो सरकारी सहित दिल्ली के 29 अस्पतालों में वेंटिलेटर बेड खाली नहीं हैं। इस वजह से मरीजों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं।
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दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर बीबी वाधवा ने बताया कि कुछ लोग कोरोना के प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज कर रहे हैं। नतीजतन, अधिकांश मामलों में मरीज डॉक्टर के पास तब पहुंचते हैं जब स्थिति खराब होती है। गंभीर हालत में अधिकतर लोग उपचार के लिए निजी अस्पतालों का ही रुख करते हैं, इसलिए इन अस्पतालों में वेंटिलेटर बेड भर रहे हैं। लोगों से अपील है कि संक्रमण का कोई भी लक्षण दिखते ही तुरंत जांच कराएं और अपने स्वास्थ्य के हिसाब से अस्पताल या होम आइसोलेशन में इलाज कराएं। डॉ. वाधवा के मुताबिक, इस समय संक्रमण को लेकर बरती गई जरा सी भी लापरवाही काफी घातक साबित हो सकती है।
लगातार बढ़ाए जा रहे बेड
राजधानी के निजी अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाने के लिए पिछले दिनों सरकार ने एक आदेश जारी किया था, जिसके मुताबिक 15 निजी अस्पतालों में कोरोना उपचार के लिए 50 फीसदी आईसीयू और वार्ड बेड आरक्षित किए गए थे। बीते कुछ सप्ताह में ही सरकार कोविड मरीजों के लिए 5000 से ज्यादा बेड बढ़ा चुकी है।
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इन अस्पतालों में वेंटिलेटर बेड भरे
दिल्ली कोरोना एप के मुताबिक, विमहन्स अस्पताल, वेंकटेश्वरा, तीरथ राम अस्पताल, सेंट स्टीफन अस्पताल, अग्रसेन, सरोज अस्पताल, मूलचंद, फोर्टिस (शालीमार बाग), राजीव गांधी सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल, मेट्रो अस्पताल, मैक्स (पटपड़गंज), कालरा अस्पताल, जीवन माला अस्पताल, फोर्टिस (वसंत कुंज), फोर्टिस (ओखला) धर्मशीला अस्पताल, दिल्ली हार्ट इंस्टीट्यूट, बीएलके, बत्रा अस्पताल, आयुष्मान अस्पताल, आकाश हेल्थ केयर, ब्रहम शक्ति अस्पताल, बुराड़ी अस्पताल, होली फैमिली, ज्ञान अस्पताल, जीवन अनमोल अस्पताल, कालरा अस्पताल, इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर और गोयल अस्पताल।
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