केंद्र सरकार ने दिल्ली के संविधान को संशोधित करके केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल के अधिकारों को बढ़ा दिया है। इस बात के सामने आने के बाद से ही आम आदमी पार्टी इससे बेहद नाराज है और केंद्र पर चुनी हुई सरकार की शक्तियां कम करने का आरोप लगा रही है।
मनीष सिसोदिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि, आज कुछ मीडिया रिपोर्ट से पता चला कि केंद्र सरकार ने कल बहुत गोपनीय तरीके से दिल्ली में चुनी हुई सरकार के मुख्यमंत्री और मंत्रियों के अधिकार कम करके उनको उपराज्यपाल को देने का एक कानून पास किया है।
केंद्र सरकार ने गोपनीय तरीके से दिल्ली के चुने हुए मुख्यमंत्री और मंत्रियों के अधिकार छीनकर एलजी को देने के लिए GNCTD ACT में बदलाव किया है। अब दिल्ली की चुनी हुई सरकार के पास निर्णय लेने की शक्ति नहीं होगी। केंद्र सरकार का कदम लोकतंत्र की आत्मा और संविधान के भी खिलाफ है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को उपराज्यपाल को और अधिक अधिकार देने के लिए दिल्ली सरकार के एनसीटी अधिनियम में कुछ प्रस्तावित संशोधनों को मंजूरी दे दी है। साथ ही एलजी को विधायी और प्रशासनिक प्रस्ताव भेजने के लिए दिल्ली की निर्वाचित सरकार के लिए समय-सीमा भी निर्धारित कर दी है। केंद्र ने संसद के इसी बजट सत्र के दौरान विचार और पारित करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक 2021 को शामिल किया है।
इनमें उन विषयों का भी उल्लेख है, जो विधानसभा के दायरे से बाहर आते हैं, यह संशोधन गवर्नेंस को बेहतर करने और LG और दिल्ली सरकार के बीच टकराव कम करने के लिए किए जा रहे हैं। नए संशोधन के मुताबिक अब विधायी प्रस्ताव उपराज्यपाल के पास कम से कम 15 दिन पहले और प्रशासनिक प्रस्ताव सात दिन पहले पहुंचाने होंगे।
बता दें कि केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते दिल्ली के एलजी को कई अधिकार मिले हुए हैं, इसको लेकर केजरीवाल सरकार कई बार विरोध जता चुकी है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा था। बाद में कोर्ट ने सरकार और उपराज्यपाल के अधिकार तय किए थे, लेकिन इसके बावजूद भी एलजी और दिल्ली सरकार आमने-सामने आते रहते हैं।