-दिल्ली विश्वविद्यालय के वायस रीगल लॉज में सीमा विमर्श पर आयोजित सम्मेलन को किया संबोधित
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत का निर्माण वेदों की परंपरा और ऋषियों के आध्यात्मिक विकास के रूप में हुआ है। हमारा देश विविधता में एकता वाला देश है। जब हम अपने राष्ट्र के मूल को समझ पाएंगे तभी घुसपैठ की मूल समस्या से निजात पा सकेंगे। सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों से हमारा जुड़ाव हो सकेगा। यह बातें तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने मुख्य अतिथि के तौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के वायस रीगल लॉज में सीमा विमर्श पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहीं।
डीयू के मोतीलाल नेहरू कॉलेज (सांध्य), सीमा जागरण मंच और सेंटर फॉर इंडिपेंडेंस एंड पार्टीशन स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में यह सम्मेलन आयोजित हुआ। राज्यपाल आर एन रवि ने आगे कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इसी उद्देश्य से सीमावर्ती क्षेत्रों विशेषकर जनजातियों के मध्य बहुत अच्छा कार्य किया है। सीमा पार घुसपैठ को रोकने के लिए जितनी आवश्यकता सेना और संसाधनों की है। उतनी आवश्यकता सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ समाज के समन्वय की भी है।
वेरियर एल्विन ने अपनी वैचारिकी के आधार पर नॉर्थ ईस्ट की व्याख्या की। यह माना जाने लगा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग हमसे भिन्न हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि सीमावर्ती जनजाति समाज वहां के नागाओं की भी पूर्व कथाएं कृष्ण, रुक्मणि इत्यादि से जुड़ती हुई दिखाई देती है। यानि वह सब भारतीय राष्ट्र की ही संकल्पना का अभिन्न हिस्सा है। सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि डीआरडीओ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी ने कहा कि सीमा पर घुसपैठ आज एक ज्वलंत विषय है। इसके सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सभी पहलुओं पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है।
सम्मेलन में डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह, संयोजक डॉ. श्याम नारायण पांडेय ने अपने विचार रखे।