नई दिल्ली (सीमा शर्मा)। देश में पहली बार नई शिक्षा नीति-2020 के तहत आईआईटी खड़गपुर के अलावा दिल्ली के दो इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय मिलकर मेडिकल की पढ़ाई करवाने की तैयारी कर रहे हैं। दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) और नेताजी सुभाषचंद्र तकनीकी विश्वविद्यालय (एनएसयूटी) ने जनवरी 2021 में इंजीनियरिंग के साथ मेडिकल की पढ़ाई करवाने का ड्राफ्ट तैयार कर सरकार को भेजा है। खास बात ये है कि च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के तहत इंजीनियरिंग और मेडिकल के छात्र अपने मनपसंद विषयों को पढ़ सकेंगे।
दिल्ली सरकार से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, शैक्षणिक सत्र 2022-23 से इंजीनियरिंग के साथ मेडिकल की पढ़ाई शुरू करवाने की योजना है। इसी के तहत दिल्ली सरकार को ड्राफ्ट बनाकर भेजा गया है। दिल्ली सरकार से अनुमति मिलने के बाद राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (नेशनल मेडिकल कमीशन) से मंजूरी मांगी जाएगी।
दो अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलेगा
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (नेशनल मेडिकल कमीशन) की गाइडलाइन के तहत दोनों विश्वविद्यालयों ने कैंपस के दस किलोमीटर के क्षेत्र में दो-दो जिला अस्पतालों को भी चिह्नित किया है। इसके तहत नेताजी सुभाषचंद्र तकनीकी विश्वविद्यालय (एनएसयूटी) ने द्वारका के सेक्टर-9 में निर्माणाधीन इंदिरा गांधी अस्पताल (1241 बेड का 31 मार्च 2021 तक बनकर तैयार होना है) और डीटीयू ने रोहिणी स्थित भगवान महावीर अस्पताल को अपने ड्राफ्ट प्लान में शामिल किया है। इन अस्पतालों को दोनों तकनीकी विश्वविद्यालय अपने साथ जोड़ेंगे। इन्हें मेडिकल कॉलेज का दर्जा दिलवाकर एमबीबीएस की पढ़ाई भी शुरू होगी।
बीटेक और एमबीबीएस अलग, पर रिसर्च एक साथ
दोनों तकनीकी विश्वविद्यालय जेईई मेन मेरिट स्कोर से बीटेक में दाखिला देंगे, जबकि नीट मेरिट स्कोर के आधार पर एमबीबीएस और बीडीएस प्रोग्राम में सीट मिलेगी। इसी में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के तहत इंजीनियरिंग और मेडिकल छात्रों को अपने मनपसंद विषयों की पढ़ाई करने का मौका मिलेगा। इसके अलावा बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, पीएचडी और मास्टर प्रोग्राम में ज्वाइंट रिसर्च होगी।
बहुविषयक डिग्री पर फोकस
नई शिक्षा नीति में बहुविषयक डिग्री पर फोकस किया गया है। इसी का प्रयोग मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रोग्राम में होगा। मेडिकल पढ़ाई अब मेडिकल विषयों के अलावा एडवांस तकनीक पर आधारित है, इसलिए एमबीबीएस की पढ़ाई और मेडिकल रिसर्च प्रोग्राम के स्कॉलर्स को एआई, रोबोटिक, सिग्नल प्रोसेसिंग, क्वांटम टेक्नोलॉजी, नॉन लीनियर डायनमिक, नैनो टेक्नोलॉजी, मशीन लर्निंग आदि में दक्ष किया जाएगा। इसका मकसद आधुनिक तकनीक के माध्यम से शल्य उपकरणों का डिजाइन, नई तकनीक व दवा ईजाद करना आदि शामिल होगा।