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सहायक निदेशक बनकर ठगी में माली समेत दो पूर्व डीडीए कर्मी गिरफ्तार

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पुलिस की गिरफ्त में दोनों आरोपी। - फोटो : Ashram
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नई दिल्ली। डीडीए से बर्खास्त किए जा चुके माली और भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित कर्मचारी ने प्लॉट दिलाने का झांसा देकर 1.90 करोड़ रुपये ठग लिए। खुद को सहायक निदेशक बताने वाले माली और निलंबित कर्मी ने मिलकर डीडीए प्लॉट का फर्जी आवंटन पत्र जारी कर दिया था। वर्ष 2013 में दर्ज मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मंगलवार को दोनों आरोपियों जनकपुरी निवासी प्रेमशंकर शर्मा (67) और गाजियाबाद निवासी राणा प्रताप चौहान (72) को गिरफ्तार कर लिया। प्रेमशंकर शर्मा और राणा प्रताप चौहान के खिलाफ दिल्ली के अलग-अलग थानों में 13 मामले दर्ज हैं।
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आर्थिक अपराध शाखा के संयुक्त पुलिस आयुक्त डा. ओपी मिश्रा के अनुसार आशीष शर्मा ने वर्ष 2013 में शिकायत दर्ज कराई थी। आशीष ने शिकायत में कहा था कि प्रेमशंकर शर्मा, आरपी चौहान और शैलेंद्र ने सी-ब्लाक, कृष्णा नगर में 250 वर्गगज का प्लॉट देने के नाम पर उससे 1.90 करोड़ रुपये ठग लिए हैं। तीनों ने प्लॉट दिखाया और कहा कि इसकी खरीद मूल्य 22 लाख रुपये है। जबकि उस समय प्लॉट का बाजार मूल्य काफी ज्यादा था। आरोपियों ने आशीष से 1.90 करोड़ रुपये ले लिए और उसे डीडीए की ओर से फर्जी आवंटन पत्र दे दिया। आवंटन पत्र फर्जी होने की बात पता चलने पर पीड़ित ने तीनों से पैसे मांगे। आरोपियों ने उसे 80 लाख रुपये का चेक दिया। जो बाउंस हो गया। इसके बाद आरोपियों ने पैसे देने से इनकार कर दिया। आशीष की शिकायत पर शाखा में मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस ने डीडीए से प्लॉट के आवंटन पत्र, कब्जा पत्र और एनओसी के बारे में जांच की तो पाया कि सारे कागजात फर्जी हैं। जांच में यह बात सामने आई कि आरोपियों ने पीड़ित से 22 लाख रुपये डीडीए के नहीं बल्कि किसी दूसरे खाते में जमा कराए थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रेमशंकर शर्मा और आरपी चौहान इसी तरीके से 13 से ज्यादा लोगों से करोड़ों की ठगी कर चुके हैं।
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पीड़ितों से डीडीए ऑफिस में मिलते थे दोनों आरोपी
आरोपी प्रेमशंकर शर्मा डीडीए के बागवानी विभाग में माली था। उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। पुलिस के मुताबिक वह पीड़ितों से डीडीए ऑफिस में मिलता था। पीड़ितों से बातचीत में कभी वह खुद को डीडीए का सहायक निदेशक तो कभी यूनियन लीडर बताता था। वह ही खुद फर्जी कागजात बनाता था। वहीं दूसरा आरपी चौहान डीडीए में यूडीसी था। भ्रष्टाचार के आरोप में उसे डीडीए से वर्ष 1999 में निलंबित कर दिया था।
डीडीए के नाम पर खोला था फर्जी खाता
आरोपी पीड़ितों को डीडीए के नाम पर फर्जी कागजात देते थे। पीड़ित को विश्वास दिलाने के नाम पर ये उससे डीडीए के नाम से खोले गए बैंक खातों में पैसे जमा कराते थे। पीड़ित आशीष से भी इसी तरह 22 लाख रुपये डीडीए के नाम पर खोले गए खाते में जमा कराए थे।
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