करनाल निवासी 75 वर्षीय एक बुजुर्ग बांग्लादेशियों के दिल्ली से रूस के लिए अवैध वीजा लगवा रहा था। चाणक्यपुरी थाना पुलिस ने बुजुर्ग समेत दो आरोपियों को अवैध वीजा लगवाने के मामले में गिरफ्तार किया है। बुजुर्ग के पास से 16 बांग्लादेशी पासपोर्ट व पंजाब के व्यक्ति के एक कब्जे से एक पासपोर्ट बरामद किया गया है।
बुजुर्ग एक बांग्लादेशी का रूस के लिए वीजा एक लाख रुपये में लगवाता था। पुलिस बुजुर्ग जनरैल सिंह के बेटे की तलाश कर रही है। बताया जा रहा है कि आरोपी 100 से ज्यादा लोगों को नकली वीजा बना चुके हैं और कई बांग्लादेशियों को भारत से विदेश भेज चुके हैं।
नई दिल्ली जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार केरल निवासी शिबू अपने तीन साथियों का वीजा लगवाने दिल्ली स्थित रसियन एंबेसी में आया था। रसियन एंबेसी में उसे बताया गया था कि कोरोना के कारण फिजिकल कोई काम नहीं हो रहा है अत: वह ऑनलाइन आवेदन करें। शिबू जब एंबेसी से बाहर निकला तो बाहर हरमनप्रीत सिंह नाम का व्यक्ति मिला।
उसने शिबू से कहा कि वह 30 हजार रुपये में रसिया का वीजा लगवा देगा। शिबू ने उसे तीन पासपोर्ट व 30 हजार रुपये दे दिए। 60 हजार रुपये बाद में देना तय हुआ। कुछ दिनों बाद हरमनप्रीत सिंह पुत्र सीतल सिंह ने व्हाट्सएप पर वीजा भेजा दिया। शिबू ने रसियन एंबेसी में जाकर पता किया तो वीजा फर्जी था। शिबू ने इसकी शिकायत चाणक्यपुरी थाने में की। मामला दर्जकर चाणक्यपुरी एसीपी प्रज्ञा आनंद की देखरेख में एसआई अश्विनी कुमार, हवलदार शिवशंकर व सिपाही प्र्रेमप्रकाश की टीम ने जांच शुरू की।
इस टीम ने हरमनप्रीत सिंह को पहाडग़ंज के एक होटल से उस समय गिरफ्तार कर लिया जब वह शिबू से और पैसे लेने आया था। हरमनप्रीत सिंह की निशानदेही पर प्रेम नगर, करनाल से बुजुर्ग जनरैल सिंह को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से 16 बांग्लादेशी पासपोर्ट बरामद किए गए। जांच में पता लगा कि जनरैल सिंह पासपोर्ट व वीजा लगवाने के लिए अधिकृत हैं। मगर इसकी आड़ में वह अवैध रूप से बांग्लादेशी समेत अन्य लोगों को पैसे लेकर वीजा लगवा रहे थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार बांग्लदेशी भारत में वीजा लगवा कर नहीं जा सकते।