संजय गांधी अस्पताल में अगले पांच महीने में ट्रामा सेंटर बनकर तैयार होगा। इसके लिए निर्माण कार्य पूरा होना की समय सीमा अक्तूबर तक की हो गई है। ऐसे में ट्रामा सेंटर के निर्माण को लेकर कार्य में तेजी लाई जा रही है। ट्रामा सेंटर तैयार होने के बाद मरीजों को यहां 362 बेड की सुविधा मिल सकेगी। साथ ही यह दिल्ली का सबसे बड़ा ट्रामा सेंटर भी साबित होगा।
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके अरोड़ा ने बताया कि ट्रामा सेंटर का लगभग 90 फीसदी काम पूरा हो गया है। शेष 10 फीसदी पर भी काम तेजी से चल रहा है। संजय गांधी अस्पताल में वर्ष 2019 में ट्रामा सेंटर के निर्माण का शिलान्यास किया गया था।
शिलान्यास के बाद 18 महीने में इसका निर्माण कार्य पूरा होने का लक्ष्य रखा गया थ, लेकिन कुछ कारणों की वजह से काम अटक गया था। हालांकि, अस्पताल के अधिकारी का कहना है कि लोक निर्माण विभाग(पीडब्ल्यूडी) की ओर से निर्माण कार्य पूरा होने के लिए अक्तूबर 2022 की समयसीमा दी गई है। ऐसे में प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है कि अगले पांच महीने में ट्रामा सेंटर बनकर तैयार हो जाए। इससे मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
यह मिलेंगी सुविधाएं
बहुमंजिला इमारत में मरीजों के लिए 362 बिस्तरों की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही छह ऑपरेशन थियेटर भी तैयार होंगे। इससे दुर्घटना के मरीजों को इलाज में मिलने में अधिक सुविधा होगी। खास बात यह है कि इस ट्रामा सेंटर में आईसीयू, आपातकालीन और ट्रामा के 50 फीसदी बेड आरक्षित होंगे। वर्तमान में पश्चिमी और बाहरी दिल्ली के दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को अन्य ट्रामा सेंटर में भेजा जाता है।
वर्तमान में तीन जगहों पर हैं ट्रामा सेंटर
राजधानी में वर्तमान में तीन बड़े अस्पतालों में ट्रामा सेंटर की सुविधा है। इसमें दिल्ली का सबसे पहला ट्रॉमा सेंटर सुश्रुत ट्रामा सेंटर है। इसे दिल्ली सरकार ने 1998 में लोक नायक अस्पताल की मदद से तैयार करवाया था। यहां बेड की क्षमता करीब 60 है। वर्ष 2006 में एम्स ने जयप्रकाश नारायण ट्रॉमा सेंटर शुरू किया था। यहां बेड की कुल क्षमता करीब 250 है।
इनमें 10 से अधिक निजी बेड भी शामिल हैं। वहीं, अधिकांश बेड सामान्य के लिए हैं। यहां पांच ऑपरेशन थियेटर के साथ-साथ 25 से अधिक आईसीयू बेड हैं। वहीं, केंद्र के राम मनोहर लोहिया अस्पताल ने 2008 में ट्रॉमा सेंटर शुरू किया था। यहां की छह मंजिला इमारत में 70 से अधिक बेड हैं। साथ ही 10 से अधिक आईसीयू बेड व ऑपरेशन थियेटर भी हैं।
हालांकि, इन तीन ट्रामा सेंटरों पर दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के मरीजों का भी दबाव होता है। बड़ी दुर्घटना होने पर मरीजों को इन तीनों अस्पतालों के ट्रामा सेंटर में इलाज के लिए लाया जाता है। यही वजह है कि दिल्ली में काफी समय से अन्य ट्रामा सेंटर की भी आवश्यकता महसूस की जा रही है।
लेडी हार्डिंग अस्पताल में भी मिलेगी ट्रामा सेंटर की सुविधा
आगामी कुछ महीनों में लुटियन दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में भी मरीजों को ट्रामा सेंटर की सुविधा मिलेगी। इस सुविधा में अगले चार से पांच महीने का समय बताया जा रहा है। ऐसे में अगले पांच महीनों में दिल्ली को दो नए ट्रामा सेंटर की सौगात मिलने की संभावना है।