अदालत ने टूलकिट मामले में आरोपी निकिता जैकब, शांतनु मुलुक व शुभम कार चौधरी को राहत प्रदान कर दी। अदालत ने तीनों की अग्रिम जमानत अर्जी का निपटारा करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि यदि उनकी गिरफ्तारी की जरूरत है तो उन्हें पहले सात दिन का नोटिस दिया जाए।
पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने बचाव पक्ष व अभियोजन पक्ष के तर्क सुनने के बाद यह निर्देश दिया। अभियोजन पक्ष ने तर्क रखा कि मामले में जांच आरंभिक स्थिति में है और विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार है। वहीं बचाव पक्ष ने हालांकि पुलिस पर उनके मुवक्किलों को फर्जी
मामले में फंसाने का तर्क रखा लेकिन साथ ही कहा कि यदि पुलिस उनके मुवक्किलों को तुंरत गिरफ्तार न करे और गिरफ्तारी की जरूरत पड़ने पर कार्य दिवस में सात दिन पहले नोटिस दे तो वे याचिका वापस लेने को तैयार है।
अभियोजन पक्ष ने उनके इस तर्क पर सहमति जताते हुए कहा कि यदि आरोपियों की हिरासत में पूछताछ की जरूरत होगी तो वे नोटिस देने के लिए तैयार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उनकी नजर में वर्तमान में पेश साक्ष्यों के आधार पर हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है।
ऐसे में वे पुलिस को निर्देश देते हुए कि यदि आरोपियों को गिरफ्तार करने की जरूरत है तो उनको गिरफ्तारी से सात दिन पहले नोटिस दिया जाए। अदालत ने इस आदेश के साथ याचिका का निपटारा करते हुए आरोपियों को जरूरत पढ़ने पर पुन: अदालत में आने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी।
इससे पूर्व बचाव पक्ष की और से तर्क रखे गए कि यह पहला मामला है कि जब स्पैशल सैल के कार्यालय में षडयंत्र रचा गया। उन्होंने कहा कि इस मामले को दर्ज करने के पीछे उनके मुवक्किलों को किसान आदोलन से दूर रखना है। वरिष्ठ अधिवक्ता रिबेजा जौन ने कहा कि हर मूवमेंट में एक हैशटैग होता है। उन्होंने कहा दावा किपुलिस का आरोप कि उनके मुवक्किल अलगाववादी की प्रवृत्ति है और यह सब एक बहाना है।
टूलकिट को एडिट किया, मै दिल्ली नहीं आया, सहआरोपियों को नहीं जानता वे भी विभिन्न शहरों से है। कभी भी आमने-सामने मीटिंग नहीं हुई। उन्होंने कहा उनका मुवक्क्लि व्हाट्सएप ग्रुप का पार्ट है, मेरे फोन से क्या सूचना दी गई स्पष्ट नहीं। उन्होंने कहा पुलिस का आरोप कि उनका मुवक्किल गायब हो गया यह गलत है मुंबई उच्च न्यायालय ने इस तथ्य को देखते हुए भी उनके मुवक्किलों को राहत प्रदान की है।
उन्होंने कहाकि उनके मुवक्किलों ने जांच में सहयोग किया है और आगे भी तैयार है। उन्होंने सवाल उठाया कि 26 जनवरी को हिसां हुई है बावजूद इसके किसान अभी भी वहां बैठे हैं। उन्होंने कहा उनका मुवक्किल जूम मीटिंग में शामिल हुआ और इसका अर्थ नहीं कि उसने किसानों व अन्य को भडकाया है। उन्होंने किसी का समर्थन यानि वकालत करना और उकसाने में अंतर है। किसानों के लिए बने कानून का विरोध अपराध नहीं है इसका अर्थ नहीं कि वे अलगाववादी है।
उन्होंने कहा कि टूलकिट सवार्जनिक है। इसमें तीन चरण हैं। चर्चा और वकालत, दोनों पर कानून द्वारा प्रतिबंध नहीं है।उकसाना एक अपराध है । सभी आरोपियों की भूमिका चर्चा और वकालत की है, और उकसाना नहीं। उन्होंने कहा भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अधिकार है। उन्होंने कहा कि उनसे 16 दिनों में 140 घंटे पूछताछ की गई है। उनके मुवक्किल किसी भी प्रकार की हिंसा में शामिल नहीं हुए है।
उन्होंने कहा उनके मुवक्किल व्हट्सएप ग्रुप में है और पूरी सूचना फोन पर है। पुलिस ने सभी इलैक्टोनिक्स डिवाईस को सीज किया हुआ है। उन्होंने स्वयं माना है कि जू मीटिंग में शमिल हुए और टूलकिट में भी शामिल है ऐसे में उनकी गिरफ्तारी की क्या जरूरत है।