मेरी ड्यूटी निजामुद्दीन के बाबरी गेट इलाके में है। वर्ष 2002 से मैं नियमित रूप से अपनी ड्यूटी कर रहा हूं, लेकिन ऐसी परेशानी कभी नहीं देखी। कोरोना से जंग लड़ते हुए खुद के साथ परिवार को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।
जब पता चला कि निजामुद्दीन इलाके में बड़ी संख्या में लोग कोरोना पॉजिटिव मिले हैं तो एक बार मन में डर पैदा हुआ, लेकिन फिर मैंने अपनी जिम्मेदारी निभाने की सोची और युद्ध में उतर पड़ा। सुबह निजामुद्दीन इलाके में जाने से पहले खुद को पूरी तरह सुरक्षित करता हूं।
हाथों में दस्ताने, मुंह पर मास्क और सुरक्षित सूट पहनकर जाता हूं, ताकि कोरोना वायरस मुझ तक और मेरे घरवालों तक न पहुंच सके। सबसे पहले निजामुद्दीन इलाके को सैनिटाइज किया जाता है। इसके बाद झाड़ू लगती है। झाड़ू लगाने के बाद हम कूड़े को सैनिटाइज करते हैं।
फिर कूड़ा उठाने के बाद उसे टिपर में डालकर वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में निष्पादन के लिए भेज दिया जाता है। वहीं, जिस जगह से कूड़ा उठाया जाता है, उसे भी सैनिटाइज किया जाता है। घरों से कूड़ा उठाते समय विशेष रूप से ध्यान रखता हूं।
खासकर उन घरों में, जहां कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। कूड़ा उठाते समय मैं घर के लोगों से भी उचित दूरी बनाए रखता हूं। साथ ही, उन लोगों को भी अपने से दूर रहने के लिए कहता हूं, ताकि संक्रमण किसी भी सूरत में न फैल सके। हम कोरोना से जंग तभी जीत सकते हैं, जब जनता भी हमारा बराबर साथ दें।