दिल्ली दंगा मामले में गिरफ्तार आरोपी एवं जेएनयू की छात्रा गुलफिशा फातिमा के आरोपों पर तिहाड़ जेल प्रशासन ने सोमवार को कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया। तिहाड़ जेल प्रशासन ने कहा गुलफिशा द्वारा लगाए गए प्रताड़ना के सभी आरोप गलत हैं।
कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने फातिमा की याचिका पर जेल प्रशासन से जवाब मांगा था। जेल प्रशासन ने कहा कि आरोपी छात्रा से किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया गया। याचिका में फातिमा ने आरोप लगाया था कि जेल में उनके साथ धर्म के आधार पर और मानसिक तौर प्रताड़ित किया जाता है। इस बाबत उन्होंने जेल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
जेल प्रशासन ने दावा किया कि फातिमा स्वयं जेल के कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करती हैं। उनसे कई बार कहा गया कि वह कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार न करें। व्यवहार में सुधार लाने के लिए उन्हें कई सुधारात्मक दंड दिए गए हैं, लेकिन उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। आरोपी छात्रा द्वारा लगातार की जा रही शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें अलग बैरक में रखा गया था।
प्रशासन ने कहा कि 15 अक्तूबर तक वह जिस बैरक में थी, उसमें 48 मुस्लिम महिला कैदी भी थीं। उनमें से किसी ने इस तरह की शिकायत नहीं की। याचिकाकर्ता ने दूध के ब्रांड बदलने की इच्छा जाहिर की थी, इस पर विचार करके ब्रांड को बदल दिया गया था। इससे पता चलता है उसके साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया।