कोरोना ने कुछ गांवों में कई परिवारों को पूरी तरह तोड़ दिया है। इनमें ईसापुर का ऐसा परिवार भी शामिल है, जिसमें एक सदस्य की तेरहवीं की रस्म पूरी होने से पहले ही दूसरे की मौत हो गई। 15 दिन के अंदर कोरोना संक्रमित होने के कारण तीन लोगों की मौत हो गई।
ईसापुर निवासी संतराम डागर की मौत 27 अप्रैल को हुई। 29 अप्रैल को उनकी पत्नी अतर कौर ने दम तोड़ दिया। परिवार के संभलने से पहले ही 13 मई को संतराम के बेटे जयभगवान की मौत हो गई। परिजनों को संतराम के कोरोना संक्रमित होने का पता 25 अप्रैल को चला। उन्होंने दिल्ली एवं हरियाणा के आसपास के शहरों में अस्पताल में बेड की तलाश की, लेकिन उपलब्ध नहीं हुआ।
हरियाणा के खानपुर स्थित एक अस्पताल में बेड मिला, लेकिन अगले दिन ही वहां संतराम की मौत हो गई। इसी अस्पताल में भर्ती संतराम की पत्नी 29 अप्रैल को कोरोना से हार गई। संतराम के बेटे को दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया, लेकिन वह भी कोरोना को हरा नहीं पाया।
गांव में 25 अप्रैल से 15 मई के बीच 25 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। इससे ग्रामीण भयभीत हैं और गलियों में सन्नाटा पसरा है। उधर, एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत के बावजूद प्रशासन हरकत में नहीं आया है। पूर्व प्रधान तेज सिंह डागर ने बताया कि डिस्पेंसरी में कोरोना जांच का काम पूरी तरह बंद था। जांच करने वाला कर्मचारी बीमार होने के कारण नहीं आ रहा था। हालांकि अब जांच शुरू हो गई है।
पिता की अस्थियां उठाते ही इलाज करने पहुंचे एम्स
जयभगवान के पुत्र उमेश पेशे से डाक्टर हैं और एम्स में नौकरी करते हैं। एम्स में कोरोना के मरीजों का भार होने के कारण वे दादा व दादी के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे। वे पिता का अंतिम संस्कार करने आए और उनकी अस्थियां उठाते ही एम्स में भर्ती मरीजों का इलाज करने पहुंच गए। उनका कहना है कि उनके परिजन तो नहीं बच सके, मगर अस्पताल में भर्ती मरीज बच जाने चाहिए। इसी कारण नौकरी पर गए हैं।
दो गांवों में तीन परिवारों के दो-दो सदस्यों की मौत
ईसापुर की तरह दिल्ली के दो अन्य गांवों में तीन परिवारों के दो-दो सदस्यों की कोरोना से मौत हो चुकी है। रानीखेड़ा गांव में गत माह सगे भाइयों रण सिंह एवं सुल्तान सिंह की करीब तीन घंटे के अंदर मौत हुई थी। वहीं मदनपुर गांव में सदाराम एवं सूबेदार चंद्रभान की 15 दिन के अंदर की मौत हुई। यहीं जागेराम एवं उसकी पुत्रवधु की भी 15 दिन के अंदर मौत हो गई थी।