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हालात : गाजीपुर श्मशान में शवों को रखने की जगह नहीं, अंतिम संस्कार के लिए 5 से 6 घंटे करना पड़ रहा इंतजार  

Mon, 03 May 2021 03:48 PM IST
सुशील कुमार कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गाजीपुर श्मशान घाट पर ओमप्रकाश बताते हैं कि लाशों को रखने तक के लिए जगह नहीं है। श्मशान में लोगों की काफी भीड़ लगी है। शव का अंतिम संस्कार करने के लिए 5 से 6 घंटों का इंतजार करना पड़ रहा है।
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गाजीपुर श्मशान में शवों को रखने की जगह नहीं। - फोटो : गाजीपुर श्मशान में शवों को रखने की जगह नहीं।
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विस्तार
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दिल्ली में कोरोना से हो रही मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। पिछले दो दिनों से रोजाना 400 से अधिक लोगों की मौत हो रही है। अब तक 16,966 लोगों की मौत हो चुकी है। आलम यह है कि शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। 

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गाजीपुर श्मशान घाट पर ओमप्रकाश बताते हैं कि लाशों को रखने तक के लिए जगह नहीं है। श्मशान में लोगों की काफी भीड़ लगी है। शव का अंतिम संस्कार करने के लिए 5 से 6 घंटों का इंतजार करना पड़ रहा है। इस बीच श्मशान घाट पर लोगों द्वारा कोरोना के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
 

वहीं, दूसरी तरफ कोरोना संक्रमण के खौफ में अपने परिजन की मृत्यु होने पर उसके संस्कार की औपचारिकता बड़ी मुश्किल से निभा पा रहे हैं। सेक्टर-94 स्थित अंतिम निवास में लोग चिता में अग्नि देते ही चले जाते हैं। इसके बाद अंतिम निवास का संचालन कर रही संस्था के सदस्य ही अपनों से अधिक धर्म निभाते हुए अंतिम संस्कार की पूरी क्रिया सम्पन्न करा रहे हैं। शहर में कोरोना संक्रमण निरंतर बड़ी संख्या में लोगों को चपेट में ले रहा है। इस कारण मृत्यु बढ़ने पर लोग भयभीत हो गए हैं। 
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अंतिम निवास में गत 15 दिन से रोजाना 50 से 70 शवों का अंतिम संस्कार किया रहा है। इस दौरान अधिकतर मृतकों के परिजन चिता को अग्नि देने के तत्काल बाद घर चले जाते हैं । उनके जाने पर संस्था के सदस्य ही पूरी क्रिया संपन्न कर रहे हैं। कई बार शव को पूरी तरहा जलाने में लकड़ी भी कम पड़ जाती है। ऐसी स्थिति में संस्था के सदस्य ही लकड़ी की व्यवस्था करते हैं। इनका कहना है कि परिजन अपनी लाचारी बताते हुए उन्हें चिता संभालने के लिए बोलकर चले जाते हैं।
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