पुलिस के साथ अर्द्धसैनिक बल के जवानों की भी तैनाती
वारदात के बाद महिला के घर पर सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बीच शनिवार को पुलिस ने घर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को और बढ़ा दिया है। स्थानीय पुलिस के अलावा अर्धसैनिक बलों के कुछ जवानों की भी तैनाती की गई है। पूछताछ के बाद ही लोगों को पीड़िता के घर जाने दिया जा रहा है। परिजनों ने चिंता जताई है कि अभी मामला गर्म हैै तो पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई है, कुछ समय बीतने के बाद परिवार को यूं ही छोड़ दिया जाएगा। इसके बाद पता नहीं उनका क्या होगा।
पीड़िता अज्ञात स्थान पर सुरक्षित
पीड़ित महिला, उसके पति व बच्चे को जान का खतरा है, ऐसे में उनको अज्ञात स्थान पर सुरक्षित रखा गया है। महिला के परिवार ने उसका पता बताने से इंकार कर दिया। उनका यही कहना था कि वह जहां भी है, फिलहाल सुरक्षित है। चाहकर भी पीड़िता उस घटना को नहीं भुला पा रही हैं। स्थानीय पुलिस लगातार उसके संपर्क में है। शनिवार को विवेक विहार की थाना प्रभारी परिजनों से मिलीं।
मनोचिकित्सक बोले- समाज को सोच बदलने की जरूरत
विवेक विहार में महिला के साथ हैवानियत की घटना ने राजधानी में महिला सुरक्षा को लेकर सभी दावों पर सवाल खड़ा कर दिए हैं। महिलाओं व नाबालिगों द्वारा किए गए इस घिनौने कृत्य पर मनोचिकित्सकों ने चिंता जताते हुए महिलाओं को लेकर समाज की सोच बदलने पर जोर दिया है। मानव व्यवहार एवं संबंद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) में मनोचिकित्सक प्रोफेसर डॉ. ओमप्रकाश कहते हैं कि समाज में इस तरह की घटना उनके सोचने के नजरिए को दर्शाती है। यहां आरोप लगाने की प्रवृत्ति भी देखने को मिलती है।
पहले भी इसी तरह की घटनाएं गांव-देहात में देखने को मिली है। इस घटना के बाद समाज की सोच में बदलाव की जरूरत महसूस होती है। राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मनोचिकित्सक विभाग में प्रोफेसर डॉ. आरपी बेनीवाल कहते हैं कि एक बड़े समूह में महिलाओं, बच्चों व पुरुष द्वारा इस तरह के कृत्य को करना हैरान करना वाला है। कुछ लोग सामाजिक निष्कर्षों की परवाह न करते हुए इस तरह की प्रवृत्ति के होते हैं। लेकिन, सभी आरोपियों ने एक तरह की सोच रख पीड़िता के साथ निर्दयता की।इस तरह की घटनाएं लंबे समय से चिड़चिड़ापन, गुस्सा व बदले की भावना रखने वाले लोगों द्वारा की जाती हैं।
इलाके में करीब 75 घोषित बदमाश
विवेक विहार स्थित कस्तूरबा नगर इलाका शराब के अलावा दूसरे नशीले पदार्थों की बिक्री के लिए कुख्यात है। नशा तस्करी का धंधा करने वाली महिलाएं और इनके परिजन अपने बच्चों को भी बेहद कम उम्र से इस धंधे में लगा देते हैं। उनको पता है कि नाबालिगों को नशे की बिक्री करते पुलिस पकड़ भी लेगी तो उनके खिलाफ कोई खास कार्रवाई नहीं होगी। लड़कों व लड़कियों को इस तरह ट्रेंड किया जाता है कि पकड़े जाने पर पुलिस के आगे चुप रहते हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पूरे इलाके में करीब 75 बीसी (घोषित बदमश) हैं। इनमें भी दो दर्जन से अधिक महिलाएं शामिल हैं।
दिल्ली में जहांगीरपुर, मंगोलपुरी, रघुबीर नगर, करोलबाग, ताहिरपुर, सीमापुरी, कस्तूरबा नगर, ज्वाला नगर आदि इनके खास एरिया हैं। परिवार के पुरुष सदस्यों का काम दूसरे राज्यों से शराब तस्करी कर लाना है जबकि महिलाएं व नाबालिग लड़के स्थानीय स्तर पर शराब बेचते हैं। सूत्रों का कहना है कि महिला के साथ हुई हैवानियत के मामले में महिलाओं और नाबालिगों को इसी वजह से आगे किया गया कि इन्हें कठोर सजा नहीं मिलेगी।