केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली नगर निगम के वार्डों के परिसीमन के लिए आयोग का गठन कर दिया है। दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी विजय देव की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय आयोग चार महीने के भीतर गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। उम्मीद है इसके बाद एमसीडी चुनाव का रास्ता साफ हो जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एमसीडी एक्ट 1957 की धारा 3, 3ए व 5 द्वारा निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए निगम वार्डों के परिसीमन आयोग का गठन किया है। दिल्ली राज्य चुनाव आयुक्त विजय देव इसके अध्यक्ष बनाए गए हैं। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव पंकज कुमार सिंह और दिल्ली नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त रणधीर सहाय परिसीमन आयोग के सदस्य नियुक्त किए गए हैं।
दरअसल, 22 मई को दिल्ली के तीनों नगर निगमों का एकीकरण किया गया था। उसी दौरान चुनाव होने थे। लेकिन एकीकरण के बाद वार्ड परिसीमन की जरूरत को देखते हुए चुनाव कराना संभव नहीं था। आम आदमी पार्टी (आप) इस मसले पर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगा रही थी कि चुनाव की डर से भाजपा ने निगमों का एकीकरण किया है। परिसीमन आयोग के गठन के बाद नए सिरे से वार्ड की सीमा तय होगी। वहीं, 272 की जगह दिल्ली में अब अधिकतम 250 वार्ड होंगे। इससे कई वार्ड का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।
खुशी है केंद्र ने वार्ड परिसीमन आयोग बनाया : अरविंद केजरीवाल
केंद्रीय गृह मंत्रालय के फैसले का मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्वागत किया। साथ ही सवाल भी खड़ा किया कि केंद्र ने आयोग को यह नहीं बताया कि उन्हें कितने वार्ड बनाने हैं, ऐसे में वे कैसे दिल्ली के वार्डों का गठन करेंगे। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में कितने वार्ड होंगे, इसका कोई आदेश नहीं किया गया तो फिर ये आयोग काम कैसे करेगा? जबकि आप की वरिष्ठ नेता आतिशी ने कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार ने तीन सदस्यीय परिसीमन आयोग बनाया है, लेकिन पूरे आदेश में कहीं नहीं कहा कि पूरी दिल्ली का परिसीमन कितने वार्ड में करना है।
परिसीमन का आदेश 100 फीसदी खोखला है, क्योंकि परिसीमन समिति इस निर्णय के बिना कि कितने वार्ड बनाने हैं अपना काम खत्म करना तो बहुत दूर की बात है, अपना काम शुरू भी नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि भाजपा को पता है कि दिल्ली वालों ने भाजपा को एमसीडी से बाहर फेंकने का मन बना लिया है। इसी वजह से लगातार एमसीडी के चुनाव को टाला जा रहा है।