टीकरी बॉर्डर पर रविवार को किसान आंदोलन को जबरदस्त जन समर्थन मिला। यहां पर जुटी भीड़ को देखकर ऐसा लगा जैसे किसानों का आंदोलन फिर से अपने पुराने रंग में लौट आया है।
रविवार को यहां पर अलग-अलग खापों से हजारों लोग पहुंचे। बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी यहां पहुंचे थे। गणतंत्र दिवस पर किसानों द्वारा निकाली गई ट्रैक्टर रैली और उस दौरान हुई हिंसा के बाद किसानों का आंदोलन टूटता नजर आ रहा था।
इस बीच 27 और 28 जनवरी को टीकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन स्थल खाली पड़ गया था। यहां पर केवल कतार में खड़े ट्रैक्टर ट्रालियां और उनमें इक्का दुक्का लोग नजर आ रहे थे। लेकिन किसानों ने हार नहीं मानी और उन्होंने अपनी मांगों को जारी रखा।
इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा ने 29 जनवरी को प्रेस वार्ता कर कहा था जल्द ही वह अपने पुराने स्वरूप में लौटेंगे। वह लोगों से समर्थन की लगातार अपील कर रहे थे। उनकी अपील को समर्थकों ने स्वीकार किया और रविवार को यहां इकट्ठी भीड़ ने संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान को सच साबित कर दिखाया।
रविवार को हरियाणा की सांगवान खाप और दलाल खाप की ओर से हजारों लोगों ने टीकरी बॉर्डर पहुंचकर आंदोलन कर रहे किसानों को समर्थन दिया। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा के महिला संगठनों ने भी यहां एक बार फिर से पहुंचकर किसानो को अपना समर्थन दिया। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता जोगिंदर सिंह नैन ने कहा कि हरियाणा और पंजाब के लोग अपने काम धंधे छोड़कर फिर से आंदोलन में शामिल हो रहे हैं।
कई लोग मौजूदा समय खेतों में बोई गई गेहूं की फसल को खाद और पानी दे रहे हैं, वह भी जल्द ही लौटेंगे। जिसके बाद किसान आंदोलन ा स्वरूप और बड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जबतक सरकार किसानों की बात नहीं मान लेगी तबतक यह आंदोलन जारी रहेगा।
किसान धरने को मजबूती देने के लिए चरखी-दादरी की खाप फिर से आगे आ गई हैं। शनिवार को गाजीपुर बॉर्डर कूच करने वाली फौगाट खाप-19 अभी वहीं डटी हुई है, जबकि रविवार को सांगवान खाप-40 ने टीकरी बॉर्डर के लिए कूच किया। गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ खाप पदाधिकारी दोपहर बाद टीकरी बॉर्डर पहुंचे।
सांगवान खाप के पदाधिकारी और किसान अपने साथ रसद भी लेकर गए हैं। इस दौरान 800 से अधिक किसानों के टीकरी बॉर्डर कूच करने का अनुमान है। हालांकि जिला प्रशासन अलर्ट रहा और प्रत्येक गतिविधि की अपडेट ली गई।