दिल्ली छावनी इलाके में अगले माह लोगों को भारत-दक्षिण कोरिया के मैत्री संबंधों को दर्शाता पार्क देखने को मिलेगा। चार एकड़ से अधिक में फैले इस पार्क को दिल्ली छावनी बोर्ड विकसित कर रहा है। पूर्व जनरल थिमैया मार्ग पर स्थित इस पार्क को भारत व दक्षिण कोरिया के गौरवशाली इतिहास की थीम पर तैयार किया जा रहा है।
दरअसल, वर्ष 1950 से लेकर 1953 तक उत्तर व दक्षिण कोरिया के बीच युद्ध चला था। उस समय तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष जनरल के एस थिमैया ने दोनों देश के बीच शांति दूत बनकर काम किया था। इसके बाद वर्ष 1953 में युद्ध पर विराम लगा था। इसके बाद भारत व दक्षिण कोरिया की मैत्रियी संबंधों की शुरुआत हुई थी।
दक्षिण कोरिया की संस्कृति से रूबरू कराएगा पार्क
पार्क को दक्षिण कोरिया की संस्कृति पर तैयार किया जा रहा है। इसके प्रवेश द्वार को सियोल स्थित प्रवेश द्वार की तरह आकार दिया गया है। पार्क में प्रवेश करने पर सामने केएस थिमैया की प्रतिमा को लगाया गया है। प्रतिमा के आसपास रंग बिरंगी लाइटें भी लगाई गई हैं। इसके अलावा पार्क में हरियाला, झूले, ट्रैक व विभिन्न प्रकार के फूल भी लगाए गए हैं जो यहां आने वाले पर्यटकों का मन मोह लेंगे।
इतिहास को बताएंगे पांच पत्थर
पर्यटकों को यह पार्क न सिर्फ खूबसूरती का एहसास दिलाएगा बल्कि गौरवशाली इतिहास से भी रूबरू कराएगा। इसके लिए पांच पत्थरों को लगाया गया है। पहले पत्थर पर रबिंद्रनाथ टैगोर द्वारा वर्ष 1929 में लिखी गई कवति द लैंप ऑफ द ईस्ट को उकेरा गया है। दूसरे पत्थर पर भारत द्वारा 20 हजार से अधिक कैदियों को स्वदेश लौटने की घटना का जिक्र किया गया है। तीसरे पत्थर पर युद्ध में कोरिया की रक्षा करने के दौरान अपने प्राणों को न्यौछावर करने वाले जवानों के नामों को लिखा गया है। चौथे पत्थर पर भारतीय जवानों की ओर से घायल होने वाले योद्धाओं को दी गई स्वास्थ्य व अन्य सेवा का भी जिक्र देखने को मिल जाएगा। इसके अलावा अंतिम पत्थर को भारतीय जवानों की वीरता व पराक्रम के लिए दिए गए पुरस्कारों के वर्णन के लिए समर्पित किया गया है।
विदेशी पर्यटकों का भी बढ़ेगा रुझान
एक अधिकारी के मुताबिक, दक्षिण कोरिया से बड़ी संख्या में आने वाले विदेशी पर्यटकों के लिए यह पार्क आकर्षण का केंद्र होगा। इस पार्क के प्रति भारतीयों के साथ-साथ कोरियाई देश के नागरिकों का भी रूझान बढ़ेगा। इससे इस क्षेत्र में पर्यटन भी बढ़ेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। हालांकि, अभी कोरोना माहमारी की वजह से विदेशी पर्यटक नहीं आ सकते हैं, लेकिन भविष्य में बेहतर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।