नई दिल्ली। प्रेम नगर किराड़ी में स्कूल बनाने के लिए डीडीए द्वारा आवंटित भूमि पहले से ही दिल्ली जल बोर्ड के नाम आवंटित है। हाईकोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के उस रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने डीडीए उपाध्यक्ष को नोटिस जारी कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न उनके खिलाफ अदालत की अवमानना कार्रवाई की जाए।
न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने मामले की सुनवाई के दौरान हैरानी जताई कि डीडीए उपाध्यक्ष एक तरफ अदालत के समक्ष रिपोर्ट पेश करते हैं कि सरकारी स्कूल बनाने के लिए भूमि आवंटित कर दी गई है। जबकि उक्त भूमि पहले ही जल बोर्ड के नाम आवंटित है। अदालत ने कहा कि डीडीए के इस रवैये के कारण ही स्कूल के निर्माण में देरी हो रही है।
अदालत ने डीडीए उपाध्यक्ष को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि ऐसा क्यों हुआ। अदालत ने मामले की सुनवाई 18 मई तय कर दी। हमारा प्रयास सामाजिक उत्थान एनजीओ के अधिवक्ता अशोक ने अवमानना याचिका में डीडीए पर अदालत से धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि हाल ही में डीडीए ने उक्त भूमि प्रेम नगर किराड़ी में सरकारी स्कूल बनाने के लिए आवंटित करने का पत्र अदालत को सौंपा था। हालांकि आज तक भूमि दिल्ली शिक्षा निदेशालय को नहीं सौंपी गई।
उन्होंने जांच करने पर पाया गया कि यह भूमि पहले से ही जल बोर्ड के नाम आवंटित है। उन्होंने कहा कि डीडीए लगातार अदालत के आदेश की अवहेलना कर रहा है। ऐसे में उपाध्यक्ष अनुराग जैन के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने तर्क रखा था कि प्रेम नगर में कोई भी सरकारी स्कूल नहीं है, ऐसे में हजारों बच्चों को रेलवे लाइन पार करके दूरदराज इलाके के स्कूलों में जाना पड़ता है।
अग्रवाल ने दायर याचिका में आरोप लगाया है कि हाईकोर्ट ने पहले 24 सितंबर 2019 को डीडीए को प्रेम नगर में सरकारी स्कूल बनाने के लिए भूमि आवंटित करने का निर्देश दिया था। करीब 15 माह बाद भी भूमि आवंटित न करने के मामले में अवमानना याचिका पर डीडीए ने भूमि आवंटित करने का तर्क रखा लेकिन अब फिर मामला वहीं का वहीं है।