नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से सख्त सवाल किया कि क्षत्रिय करणी सेना को जंतर मंतर पर आरक्षण नीति और यूजीसी नियमों के खिलाफ प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी गई। न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने कहा कि कैसे हो सकता है पूर्ण प्रतिबंध? कोर्ट ने पुलिस से कहा कि अनुमति पूरी तरह से नकारने के बजाय प्रदर्शनकारियों पर शर्तें लगाई जा सकती थीं। क्षत्रिय करणी सेना ने 20 सितंबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, जिसे पुलिस ने अस्वीकार कर दिया था।
न्यायमूर्ति शर्मा ने पूछा कि अगर आप कोई पाबंदी लगाना चाहते हैं तो बताएं। आपने खारिज क्यों कर दिया? क्या इस तरह का आदेश पारित किया जा सकता है, सिर्फ इसलिए कि आपको आशंका है कि कुछ लोग आ सकते हैं, आप ऐसा आदेश कैसे पारित कर सकते हैं? अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने पुलिस की ओर से कहा कि उन्होंने स्टैंडिंग ऑर्डर और सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि यह संवेदनशील क्षेत्र है और अन्य लोगों को भी लगातार अनुमति नहीं दी जाती। ब्यूरो