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Delhi News: एसआईआर में लगे शिक्षक, स्कूलों में कैसे होगी पढ़ाई

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सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले पचास हजार शिक्षकों में से अनुमानित 8 हजार शिक्षक की बतौर बीएलओ लगी ड्यूटी
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सरकारी स्कूल शिक्षक संघ ने सरकार से तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद एक जुलाई से सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं लेकिन बच्चों की पढ़ाई पर संकट है। दरअसल सरकारी स्कूल के शिक्षकों को जुलाई से अक्तूबर तक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के रूप में एसआईआर ड्यूटी पर लगा दिया गया है।
इस कारण से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में सरकारी स्कूल शिक्षक संघ ने दिल्ली सरकार से इस संबंध में तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में करीब 50 हजार शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से अनुमानित 8 हजार शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी में लगा दिया गया है। ऐसे में जिन स्कूलों के शिक्षकों को इस ड्यूटी में लगाया गया है, वह इस कार्य में ही व्यस्त रहेंगे। इस कारण स्कूलों में नियमित कक्षाएं लगने और छात्रों की पढ़ाई बाधित होने की आंशका है। सरकारी स्कूल शिक्षक संघ के अनुसार बीएलओ और बीएलओ सुपरवाइजर के रूप में नियुक्त शिक्षक 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक घर-घर जाकर मतदाता सत्यापन और सर्वेक्षण का कार्य करेंगे।
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इसके बाद मतदाता सूची के प्रारूप प्रकाशन, दावे, आपत्तियों के निस्तारण और अंतिम सूची के प्रकाशन तक निर्वाचन संबंधी प्रक्रिया 3 अक्तूबर, 2026 तक जारी रहेगी। ऐसे में करीब साढ़े तीन महीने तक बड़ी संख्या में शिक्षक विद्यालयों में नियमित अध्यापन नहीं कर पाएंगे।
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दसवीं व बारहवीं के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका
संघ के महासचिव अजय वीर यादव ने कहा कि शिक्षकों की अनुपस्थिति में विद्यालयों में केवल समायोजन के आधार पर कक्षाएं संचालित करनी पड़ेंगी, जिससे लाखों विद्यार्थियों विशेषकर दसवीं व बारहवीं कक्षा के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। इस संबंध में संघ महासचिव अजय वीर यादव ने दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद को पत्र लिखकर मांग की है कि एसआईआर कार्य में लगाए गए शिक्षकों के स्थान पर प्रतीक्षारत गेस्ट टीचर्स की तत्काल नियुक्ति की जाए। उनका कहना है कि जुलाई से अक्तूबर तक का समय शैक्षणिक सत्र का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। इसी दौरान विद्यार्थियों की आधारभूत पढ़ाई होती है और अर्ध-वार्षिक व बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी शुरू होती है।
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