संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में रेलवे में तैनात तरुण शुक्ला ने आखिरी प्रयास में सफलता पाई है। उन्होंने बिना कोचिंग के अपने छठे प्रयास में परीक्षा में 231वीं रैंक लाकर अपना और परिवार का सपना साकार कर दिया। तरुण को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें आइएएस, आईपीएस या आइएफएस में से किसी एक सेवा की जिम्मेदारी मिलेगी।
मूल रूप से लखनऊ के केशवनगर के रहने वाले तरुण शुक्ला वर्तमान में कर्नाटक के हुबली में रेलवे में इंजीनियरिंग सेवाओं में तैनात हैं। वर्ष 2015 में उन्होंने यूपीएससी द्वारा इंजीनियरिंग सेवाओं में सफलता पाई थी। इसके बाद कर्नाटक में सेवाएं दे रहे थे, लेकिन सिविल सेवाओं के प्रति उनका आकर्षण कम नहीं हुआ। तरुण ने बताया कि रेलवे में तैनात होने के बाद उन्होंने सिविल सेवाओं की परीक्षा तैयारी शुरू की। इस दौरान तैयारी के लिए कम समय मिलता था, लेकिन जितना भी समय मिलता था, वह समय तैयारी में ही दिया। वर्ष 2019 में शादी होने के बाद भी तैयारी को नहीं छोड़ा। बीते छह साल में तरुण छह बार सिविल सेवाओं में शामिल हुए और तीन बार साक्षात्कार देने के बाद अब अंतिम सूची में जगह बना ली है।
एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों को बनाया आधार
तरुण ने बताया कि सिविल सेवा की तैयारी के दौरान उन्होंने अन्य किताबों का अधिक अध्ययन करने के बजाय एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों पर अधिक ध्यान दिया। पाठ्यपुस्तकों से नोट्स तैयार कर रिविजन पर जोर दिया। वहीं, मुख्य परीक्षा के लिए समय मिलने पर अधिक से अधिक लेखन कर परीक्षा की तैयारी रखा।
माता-पिता और पत्नी को दिया सफलता का श्रेय
तरुण ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और पत्नी को दिया है। उन्होंने बताया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान जब भी उतार-चढ़ाव आए तो माता-पिता के साथ पत्नी ने हिम्मत दी और तैयारी चलती रही। पत्नी व माता गृहणी हैं और पिता राज्य विद्युत सुरक्षा विभाग में कलर्क के पद पर कार्यरत हैं।
सोशल मीडिया से बनाई दूरी
नौकरी के साथ-साथ परीक्षा की तैयारी करने के लिए तरुण ने समय प्रबंधन पर खासा ध्यान दिया। उन्होंने बताया कि वह सुबह छह बजे उठकर नौ बजे तक नियमित अध्ययन किया करता थे। इसके बाद दोपहर में जब भी समय मिलता तो नोट्स व किताबों से रिविजन कर लिया करते थे। छुट्टी वाले दिन बाहर घूमने के बजाय घर में ही रहकर अपनी तैयारी को धार देते थे। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया से भी दूरी बनाई रखी।