दिल्ली का पारा लगातार नीचे जा रहा है और ठंड विकराल रूप धारण किये हुए है। इस कड़ाके की ठंड में दिल्ली की सीमाओं पर डटे अपने किसान भाइयों के लिए हरियाणा और दिल्ली के किसानों ने सुविधाएं बढ़ा दी हैं। किसानों के लिए गर्म कपड़े, बिस्तर, अलाव जलाने के लिए उपले, लकड़ियां भारी मात्रा में भेजी जा रही हैं। इस बीच किसान भाइयों के लिए सुबह शाम दूध की सप्लाई भी बढ़ा दी गई है।
टीकरी बॉर्डर पर रोजाना लगभग आधा दर्जन से अधिक दूध की गाड़ियां भेजी जा रही हैं ताकि किसानों को पीने के और चाय के लिए पर्याप्त मात्रा में दूध की आपूर्ति हो सके। बहादुरगढ़, जींद, दादरी के किसान और समाजसेवी संगठन टीकरी बॉर्डर पर सुबह शाम दोनों पहर ताजे दूध की सप्लाई दे रहे हैं। दादरी से बाबा स्वामी दयाल सेवा संघ की ओर से दूध की दो गाड़ियां सुबह और शाम यहां आ रही हैं।
कार्यकर्ता राजेश गोदारा ने बताया कि बड़ी संख्या में दादरी के आम लोग स्वेच्छा से अपने घर का दूध निकालकर उनके पास पहुंचा रहे हैं। वहीं कार्यकर्ता लोगों के घर जाकर भी दूध इकट्ठा करते हैं जिसे दिन में दो बार किसानों तक पहुंचा दिया जाता है।
यहां किसानों को दूध लेने के लिए कोई रोक टोक नहीं हैं। जिसको जितना जरूरत हो, उतना दूध दिया जाता है। इसी तरह से पालम से हरीश सोलंकी रोजाना टीकरी बॉर्डर पर दूध की सप्लाई दे रहे हैं। यदि दूध कम इकट्ठा होता है तो पैकेट का दूध भी खरीदकर किसानों तक पहुंचाया जाता है।
भारतीय किसान युनियन (लक्खोवाल) के अध्यक्ष हरप्रीत भाऊ ने बताया कि पिछले 25 दिनों से कभी दूध नहीं खरीदना पड़ा है। सूखा राशन वह अपने साथ खुद लेकर आए हैं। लेकिन हरी सब्जियों और दूध की सप्लाई बराबर दिल्ली और हरियाणा के किसान भाई पहुंच रहे हैं।