बवाना थाना प्रभारी दर्शनलाल ने बताया कि पिछले महीने अहमदाबाद से मंगल मंदिर मानव सेवा परिवार नाम की स्वयंसेवी संस्था का फोन उनके पास आया है। उसकी संचालिका रीतू वर्मा ने बताया कि 80 साल के एक बुजुर्ग हैं। उनका कहना है कि वह 33 साल पहले घर से निकल गये थे। उनका परिवार बवाना के किसी डाकखाने के पास रहता है। एक-दो बार बात और भी हुई।
दर्शनलाल के मुताबिक, सिपाही दिनेश और सुरेश ने डाकखाने की तलाश शुरू की। लेकिन पता चला कि वहां कोई डाकखाना है ही नहीं। नरेला रोड पर एक डाकखाना जरूर है। विभाग से पता चला कि 40 साल पहले बवाना में एक डाकघर जरूर था लेकिन उसे बंद कर दिया। उसके बाद से डाकखाना कई बार स्थानांतरित हो चुका है। काफी खोजबीन के बाद पुलिस ने उस इलाके का पता लगा लिया जहां डाकखाना हुआ करता था। पुलिसकर्मियों ने डोर टू डोर जाकर किशनलाल के बारे में जानकारी हासिल करने लगे और फिर पुलिस उसके बेटे तक पहुंच गयी।
पिता के जीवित होने का नहीं हुआ यकीन, बेटे ने वीडियो कॉल पर बात की
प्रवीण बताते हैं कि पुलिस कर्मियों ने जब पिता के बारे में बताया कि वह अहमदाबाद हैं तो उसे उनके जीवित होने पर यकीन नहीं हुआ। उसने अपने चाचा को यह बात बतायी और पुलिसकर्मियों को वीडियो कॉल पर पिता से बात करवाने के लिए कहा। वीडियो कॉल के दौरान किशनलाल और उनका परिवार सिर्फ एक दूसरे को देखता रहा। फिर उसके चाचा ने कहा कि यह उनके भाई ही हैं। प्रवीण ने रीतू वर्मा से उनके कुछ फोटोग्राफ भेजने के लिए कहा। प्रवीण बताते हैं कि स्वयंसेवी संस्था वाले उनके लिए भगवान साबित हुए। उन्होंने ऐसा पुण्य काम किया है, जिसकी जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है।
बढ़ी हुई दाढ़ी और फटे हुए हाल में मिले थे किशनलाल
रीतू वर्मा का कहना है कि बीते 19 नवंबर उनको अहमदाबाद में हमारे सहयोगी कल्पेश की किशनलाल की मुलाकात हुई थी। उस वक्त उनकी दाढ़ी व बाल बढ़े हुए थे। कपड़े भी फटे थे। कई दिनों तक उन्होंने कुछ नहीं बताया। इस बीच हम लोग उनका विश्वास जीतते रहे। दस दिन बाद 40 साल पहले वह जयपुर के सुभाष चौक पर एक सेठ के यहां काम करते थे। हम लोगों ने वहां के पुलिस से संपर्क किया, लेकिन वहां कुछ पता नहीं चला। दिसंबर में एक दिन किशनलाल ने कहा कि उनका परिवार बवाना इलाके में रहता है। रीतू ने गूगल के जरिए ट्रैफिक विभाग का नंबर लेकर संपर्क किया, जहां से उन्हें बवाना थाना प्रभारी का नंबर मिला। रीतू कहती है कि वाकई दिल्ली पुलिस काबिले तारीफ काम करती है। उन्हें दिल्ली पुलिस से बहतरीन सहयोग मिला और उनलोगों ने किशनलाल के परिवार को खोज निकाला।
बीते दिनों के बारे में कुछ नहीं बताया
प्रवीण बताते हैं कि पिता के आने के बाद से वह काफी खुश हैं। लेकिन पिता ने अब तक बीते दिनों के बारे में कुछ नहीं बताया है। वह कहां रहे और क्या करते थे, इसके बारे में कुछ नहीं कहा है। किशनलाल ने रीतू को बताया था कि यह जयपुर में इंजन मरम्मत का काम करते थे, लेकिन वह जयपुर से गुजरात कैसे पहुंचे, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।