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अध्ययन: दिल्ली मेट्रो के सफर में यात्रियों के समय की हो रही बचत, 2021 में यात्रा समय में 26.9 करोड़ घंटे की बचत

Wed, 13 Apr 2022 06:16 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

टीईआरआई के एक हालिया अध्ययन के मुताबिक, यात्रियों के वार्षिक समय की बचत 2031 में दोगुना से अधिक करीब 57.25 करोड़ घंटे होगी। इस आंकड़े को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि देशभर की सड़कों पर अलग-अलग परिवहन साधनों से गंतव्य तक पहुंचने में रोजाना लाखों घंटों की बर्बादी हो रही है।
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दिल्ली मेट्रो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वर्ष 2021 में तयशुदा वक्त में मेट्रो के परिचालन से दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों के 26.9 करोड़ घंटे बचे। कम वक्त में अपने जरूरी कार्य के लिए गंतव्य तक पहुंचने से रोजाना लाखों यात्रियों को समय की बचत के तौर पर राहत मिली है।

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साल 2031 में सफर पर यात्रियों को लगने वाले वक्त में 57.25 करोड़ घंटे की बचत का अनुमान है। नवीनतम तकनीक से मेट्रो परिचालन की रफ्तार और त्वरित होने से 10 वर्ष बाद समय की बचत दोगुनी से अधिक होने की उम्मीद है।

द एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट (टीईआरआई) की ओर से किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, यात्रियों के वार्षिक समय की बचत 2031 में दोगुना से अधिक करीब 57.25 करोड़ घंटे होगी। इस आंकड़े को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि देशभर की सड़कों पर अलग-अलग परिवहन साधनों से गंतव्य तक पहुंचने में रोजाना लाखों घंटों की बर्बादी हो रही है। सड़कों पर बीत रहे समय में वृद्धि से कई जगह समय पर न पहुंचने से कई तरह की परेशानी और नुकसान का भी सामना करना पड़ता है। दिल्ली मेट्रो में रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की संख्या के आधार पर समय और वाहनों की संख्या में कमी और प्रदूषण में होने वाली कमी का आकलन किया गया है।

सात लाख टन प्रदूषकों को हटाने में मिलेगी मदद

दिल्ली मेट्रो सेवाओं की वजह से कई तरह के फायदे हैं। इससे वातावरण से करीब सात लाख टन प्रदूषकों को हटाने में भी मदद मिली है। कई यात्री अपने निजी वाहनों को घर पर रखते हुए मेट्रो का उपयोग करते हैं। इससे जीवाश्म ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण का मौका मिलता है। पर्यावरण की बेहतरी के लिए दिल्ली मेट्रो के कदम लगातार आगे बढ़ रहे हैं। इस मामले में डीएमआरसी सबसे जिम्मेदार संगठनों में से एक रहा है। डीएमआरसी करीब 37 मेगावाट की वर्तमान क्षमता के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन के मामले में भी अग्रणी है। दिल्ली मेट्रो अपने अनूठे प्रयासों के कारण कार्बन क्रेडिट का दावा करने वाला दुनिया का पहला रेल आधारित संगठन बना हुआ है।

ऐसे किया आकलन

सड़कों पर वाहनों की संख्या, जाम और ट्रैफिक प्रबंधन में लगने वाले औसत वक्त के आधार पर मेट्रो के सफर में यात्रियों के समय का आकलन किया गया है। मेट्रो में 2021 में यात्रियों की संख्या के औसत के आधार पर सड़कों से हटने वाले वाहनों का आकलन किया गया है। कोरोना काल से पहले मेट्रो में रोजाना 57 लाख से अधिक यात्राएं हो रही थी।
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सड़कों से कम हुए 5 लाख वाहन

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के प्रधान कार्यकारी निदेशक (कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन) अनुज दयाल के मुताबिक, मेट्रो में सफर से होने वाली समय की बचत का इस्तेमाल यात्री अपने जरूरी काम के लिए कर रहे हैं। डीएमआरसी ने 2021 में राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों से रोजाना 5 लाख से अधिक वाहनों को हटाने में मदद की। यह आंकड़ा भी 2019 की तुलना में करीब 4.74 लाख अधिक है। इसकी गणना प्रति कार, इसमें यात्रियों की संख्या के मुताबिक किया गया है। दिल्ली मेट्रो में कोरोना काल से पहले रोजाना औसतन 57 लाख यात्राएं हो रही थीं।

घंटे की ऐसे हो रही है बचत

उदाहरण के तौर पर यदि 22 किलोमीटर की दूरी मेट्रो से तय करने में 44 मिनट लगती हैं और इसी दूरी को निजी वाहन से तय करने में भीड़भाड़, जाम, ट्रैफिक में समस्या के कारण 1 घंटा 44 मिनट का वक्त लगता है तो एक यात्री रोजाना मेट्रो के सफर में एक तरफ के एक घंटे की बचत कर रहा है। रोजाना मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या से इसे गुना करने पर रोजाना घंटों में होने वाले समय की बचत का आकलन किया गया है।
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