बड़ी-बड़ी आंखें, खौफनाक चेहरा, नीला शरीर और दोनों हाथ सफेद। ये रूप पेट के कीड़े का है, जो छोटे बच्चों को बीमार बना देता है। इन दिनों ये कीड़ा दिल्ली की गलियों में घूम रहा है। जगह-जगह बच्चों को रोककर उन्हें डरा रहा है। उन्हें अपनी ताकत के बारे में भी बता रहा है, लेकिन घबराने की बात नहीं है। इसके साथ अल्बेंडा जोल भी घूम रहा है, जो कीड़े का नाशक है। पीला चेहरा और गले में स्टेथोस्कोप लेकर अल्बेंडा जोल लोगों से कह रहा है कि घबराएं नहीं, उसकी एक खुराक कीड़े को खत्म करने के लिए काफी है।
ये दोनों आपके घर या आसपास की गलियों में दिखाई दे सकते हैं, क्योंकि ये कोई और नहीं, बल्कि जिला स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर हैं, जिन्होंने इस बार राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान में 100 फीसदी लक्ष्य हासिल करने के लिए कीड़े और अल्बेंडा जोल का स्वरूप धारण किया है। डॉक्टरों की यह अनूठी पहल चर्चा का विषय बनी हुई है।
एक से नौ अप्रैल तक चलने वाले इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बच्चों को दवा पिला रही हैं। एक से 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोर को पेट के कीड़े मारने के लिए यह दवा दी जा रही है। राजधानी के स्कूल और सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी यह दवा उपलब्ध है।
मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग के डॉ. रवि कुमार ने बताया कि हर वर्ष कृमि दिवस मनाया जाता है, लेकिन इस बार कोरोना टीकाकरण के जरिए जब लोगों का सहयोग देखने को मिला तो उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर यह अनूठी पहल शुरू की। इससे लोगों में मनोरंजन के साथ अभियान का संदेश भी पहुंच रहा है। कोरोना टीकाकरण की वजह से काफी हद तक विभागीय टीमों को उनकी क्षमताओं के बारे में पता चला है। यही वजह है कि कोरोना टीकाकरण के साथ साथ दिल्ली की सभी 11 जिला स्वास्थ्य टीमें पोलियो, मिशन इंद्रधनुष और अब कृमि अभियान को सफल बनाने में जुटी हुई हैं।
कोविड के साथ बाकी टीकाकरण और अन्य स्वास्थ्य अभियान को संचालित करना काफी चुनौतियों से भरा है। विभाग के एक अन्य डॉ. विवेक बताते हैं कि राजधानी में अभी तक स्वास्थ्य टीमें आशा वर्कर, डॉक्टर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहित अन्य सभी के साथ मिलकर स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं, क्योंकि साल 2017 से 2019 के बीच दिल्ली सरकार 78 से 80 फीसदी तक लक्ष्य हासिल कर पाई, लेकिन साल 2020 से 2021 तक औसतन 55 से 57 फीसदी बच्चों को ही दवा दे सके। इस बार फिर से पुराने रिकार्ड को पार करने का लक्ष्य रखा गया है।
28 फीसदी बच्चे संक्रमित
नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) द्वारा किए सर्वेक्षण के अनुसार, दिल्ली में लगभग 28 फीसदी बच्चे किसी न किसी प्रकार के आंतों के कीड़े से संक्रमित पाए गए, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट बताती है कि पूरे विश्व में 1.3 अरब लोग कृमि रोग से पीड़ित हैं। इसमें अकेले भारत में 1 से 19 वर्ष के 24 करोड़ बच्चे संक्रमित हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दिल्ली में एनीमिया की व्यापकता अधिकांश आयु समूहों में 50 फीसदी से अधिक है जो गंभीर चिंता का कारण है।
15 लाख बच्चों का लक्ष्य पूरा करेगा विभाग
बच्चों और किशोरों में एनीमिया की रोकथाम और आंतों के कीड़ों से जुड़े संक्रमण को कम करने के लिए साल 2017 से यह अभियान साल में दो बार दिल्ली में आयोजित होता है। हालांकि, कोरोना महामारी के चलते बीते दो वर्ष यह काफी प्रभावित भी रहा। इस बार दिल्ली में 15 लाख बच्चे और किशोरों को अल्बेंडा जोल की खुराक देने का लक्ष्य तय किया गया है।