दिल्ली हाईकोर्ट ने एफएसएसएआई के उस आदेश में हस्तक्षेप से इनकार किया, जिसमें ओआरएस शब्द वाले पेय पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। कोर्ट ने कहा कि यह जन स्वास्थ्य का मामला है और ऐसे उत्पादों से लोगों को गुमराह नहीं किया जा सकता।
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह एफएसएसएआई के उस निर्देश में हस्तक्षेप नहीं करेगा, जिसमें ओआरएस शब्द को उपसर्ग या प्रत्यय के साथ भ्रामक लेबल वाले पेय पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जन स्वास्थ्य खतरे को जारी नहीं रहने दिया जा सकता।
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न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की एकल पीठ ने कहा कि यह स्वास्थ्य के लिए खतरा है, इस प्रतिबंध को जारी रखा जाएगा। जन स्वास्थ्य चिंताओं को देखते हुए अदालत इस प्रतिबंध को हटा नहीं रही है। यह टिप्पणी डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज लिमिटेड बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले में आई, जहां कंपनी ने एफएसएसएआई के 14 और 15 अक्तूबर के आदेशों को चुनौती दी थी।
इन आदेशों में इलेक्ट्रोलाइट और पेय उत्पादों के पंजीकृत ट्रेडमार्क में ओआरएस शब्द के उपसर्ग या प्रत्यय के साथ उपयोग की पूर्व अनुमति वापस ले ली गई थी।