कोरोना काल में छोटे कारोबार को लेकर व्यापारिक संगठनों ने चिंता जाहिर की है। कहा है कि सदी के सबसे बुरे दिनों से यह व्यापार जूझ रहा है। तत्काल राहत नहीं मिली तो अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले यह व्यापार बंद हो जाएंगे। न केवल उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या होगी, बल्कि आत्मनिर्भर भारत योजना को भी झटका लगेगा।
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स का कहना है कि न केवल दिल्ली, बल्कि सभी राज्यों में छोटे कारोबार ठप पड़ गए हैं। आंकड़ों के आधार पर बताया कि बीते पांच महीने में 25 प्रतिशत कारोबार बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। कंफेडरेशन ने केंद्र व राज्य सरकार से आर्थिक पैकेज का एलान करने की मांग की है।
कंफेडरेशन के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि लाखों दुकानें बंद होने की कगार पर हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे विनाशकारी होगा। भारतीय घरेलू व्यापार जो दुनिया भर में सबसे बड़ा स्वयं संगठित क्षेत्र है, लेकिन गलत तरीके से असंगठित क्षेत्र के रूप में वर्णित किया गया है। 7 करोड़ से अधिक व्यापारी इस माध्यम से रोजगार करते हैं। छोटे कारोबार में लगभग 8 हजार से अधिक मुख्य वस्तुओं का व्यापार होता है, अब इनके अस्तित्व पर ही खतरा है।
दिल्ली केमिकल एसोसिएशन से जुड़े अजय अरोड़ा का कहना है कि कोविड-19 की वजह से बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो गई है। छोटे व्यापारियों की समस्या के साथ ही उनके साथ जुड़े लाखों लोग भी बेरोजगार हो रहे है। जल्द से जल्द अगर आर्थिक पैकेज की घोषणा नहीं हुई तो आने वाला वक्त और भी आर्थिक रूप से खराब होगा।