Air Pollution: राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के दुष्प्रभाव भी सामने आने लगे हैं। स्थिति यह है कि प्राइवेट से लेकर सरकारी अस्पतालों तक की ओपीडी में मरीज बढ़ गए हैं। इनमें ज्यादातर
ऐसे रोगी हैं जो पहले से सांस रोग से ग्रस्त हैं। प्रदूषण बढ़ने से उन्हें सांस लेने में कठिनाई हो रही है। इनमें काला दमा (सीओपीडी) और अस्थमा के अधिकतर मामले हैं। वहीं, कई मरीजों की आंखों में संक्रमण (लालपन) की शिकायत भी है।
डॉक्टरों का कहना है कि चार-पांच दिन में प्रदूषण के चलते सांस लेने में परेशानी की शिकायत लेकर मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। आमतौर पर हर साल अक्तूबर में ऐसे केस आते हैं। ओपीडी के अलावा कुछ मरीज आपातकालीन सेवाओं के जरिए भी चिकित्सीय सलाह ले रहे हैं।
दिल्ली सरकार के डीडीयू अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉ. अभय शर्मा का कहना है कि उनके यहां भी ओपीडी में मरीज बढ़े हैं। दो दिन में करीब 15 मरीज सांस लेने में परेशानी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे। हालांकि, इनमें 12 मरीज ऐसे हैं जो पहले से ही सांस रोग से ग्रस्त हैं।
बढ़ानी पड़ती है दवा की डोज
डॉक्टरों के अनुसार, प्रदूषण की वजह से मरीजों को जब परेशानी होने लगती हैं तो कई बार दवाओं का असर भी कम होता है, जो मरीज पहले से लगातार जांच कराते आ रहे हैं उनकी दवाओं की डोज बढ़ानी पड़ती है। तभी उन्हें आराम मिलता है।
दूसरे रोगियों को भी खतरा
डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण से सिर्फ सांस ही नहीं, बल्कि अन्य बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को भी दिक्कत होती है। हृदय रोगियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे प्रदूषण के चलते सुबह-शाम घर से बाहर न निकलें और दवाओं का सेवन निरंतर करते रहें।
यहां रोजाना ओपीडी में बढ़े मरीज
एम्स : रोजाना आठ से 12 सांस रोगी
सफदरजंग : रोजाना आठ से 10 सांस रोगी
आरएमएल : 6 से 7
लेडी हार्डिंग : 7 से 9
डीडीयू : सात से आठ
भीमराव आंबेडकर : एक से दो
जीटीबी : चार से पांच