दिल्ली में अब पांच फरवरी से नौवीं व ग्यारवीं कक्षाओं के बच्चों केलिए स्कूल खोले जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रैक्टिकल व प्रोजेक्ट कार्यों की तैयारियों के लिए डिग्री कॉलेज व डिप्लोमा संस्थान (पॉलीटेक्निक व आईटीआई संस्थान) भी खोले जाएंगे। दिल्ली सरकार ने फैसला लिया है कि सभी सरकारी व निजी स्कूल पांच फरवरी से नौवीं व ग्यारवीं के बच्चों को स्कूल बुला सकते हैं। हालांकि स्कूल में बच्चों को अभिभावकों की सहमति से ही बुलाया जा सकेगा। स्कूल बच्चों को आने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे।
उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रेस वार्ता में नौवीं व ग्यारवीं कक्षाओं के साथ डिग्री, पॉलीटेक्निक तथा आईटीआई संस्थाओं को भी खोलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि दस महीने तक स्कूल व कॉलेज बंद होने के बाद अब परीक्षाओं व प्रैक्टिकल की तैयारियों के लिए खोला जा रहा है। स्कूलों व कॉलेजों को दोबारा खोलने संबंधी पूरी व्यवस्था करना आवश्यक है।
सिसोदिया ने कहा कि परीक्षा से पहले छात्रों की बेहतर तैयारी और काउंसलिंग आवश्यक है। ऐसे में सतर्कता के साथ स्कूलों व कॉलेजों को खोलने का निर्णय लिया गया है। जिससे बच्चे अपने अभिभावकों की सहमति से स्कूल आ सके। इससे वह परीक्षा से पहले वहां के वातावरण में भी ढल सकेंगे। उन्होंने कहा कि बीते एक साल में पढ़ाई का जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई तो नहीं होगी लेकिन जो समय बचा हुआ है उसका सदुपयोग करना जरुरी है।
उन्होंने कहा कि सरकार का पहला फोकस शिक्षा संस्थानों को अच्छी तरह खोलने और कोरोना से सुरक्षा पर है। इसके बाद हम रिजल्ट पर फोकस करेंगे। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्कूलों व कॉलेजों में जाकर कोरोना से बचाव के सभी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। हर कक्षा में सामाजिक दूरी का पालन करना, सैनिटाइजर की उपलब्धता, मास्क लगाना आवश्यक होगा।
अब स्कूलों में 80 फीसदी तक बच्चे आ रहे
दसवीं व बारहवीं की परीक्षा तैयारी के लिए 18 जनवरी को स्कूलों को खोला गया था। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि शुरुआत के दिनों में अभिभावकों के मन में कोरोना को लेकर डर था। इस कारण से बच्चों की उपस्थिति कम थी। लेकिन अब स्कूलों में कोरोना की सुरक्षा को लेकर की गई तैयारियों को देखकर अभिभावकों का आत्मविश्वास बढ़ा है। ऐसे में अब स्कूलों में 80 फीसदी तक बच्चे आ रहे हैं।