उन्होंने आगे कहा कि अगर कोविशिल्ड वही वैक्सीन राज्य सरकारों को 300 रुपये में देती है तो उसका मुनाफा 160 रुपये प्रति वैक्सीन का हुआ। इसके अलावा इसी वैक्सीन को प्राइवेट सेक्टर को देने पर उसे 260 रुपये प्रति वैक्सीन का मुनाफा मिलता है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसी कम्पनी को इतना भारी मुनाफा लेने की छूट क्यों देनी चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश के अंदर 18 साल से ज्यादा उम्र के करीब 100 करोड़ लोग हैं। इनके लिए करीब 200 करोड़ वैक्सीन चाहिए। एक कंपनी से करीब 100 करोड़ वैक्सीन लेंगे और दूसरी कंपनी से 100 करोड़ वैक्सीन लेंगे। यानि कि एक कंपनी का कुल मुनाफा करीब 16 हजार करोड़ रुपए बनेगा। प्राइवेट सेक्टर के मूल्य जोड़ने पर यही मुनाफा लाखों करोड़ रुपये हो जाता है।
जैन ने सरकार से आग्रह किया है कि अलग-अलग राज्यों के द्वारा वैक्सीन खरीद करने से देश की छवि को नुकसान पहुंचता है। सबसे अच्छा होगा कि केंद्र सरकार अपने स्तर पर वैक्सीन की खरीद कर उसे उचित अनुपात में राज्यों को उपलब्ध कराए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हिंदुस्तान के अंदर दो कंपनियां कोविशिल्ड और कोवाक्सिन के नाम से वैक्सीन बना रही हैं। उन्होंने अनुरोध किया है कि वैक्सीन बनाने का फार्मूला लेकर दूसरी कंपनियों से साझा किया जाए। जिससे कम ससमय में भारी मात्रा में वैक्सीन तैयार की जा सके।