उन्होंने कहा कि जो कम्पनी 150 रुपये में भी वैक्सीन बेचकर लाभ कमा रही है, उसे और अधिक भारी लाभ कमाने की खुली छूट क्यों दी जानी चाहिए। वह भी ऐसे समय पर जबकि कोरोना के कारण इस समय पूरा देश भारी संकट का सामना कर रहा है। सत्येन्द्र जैन ने कहा कि कोवाक्सिन के चेयरमैन ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि केंद्र सरकार को 150 रुपये में दी जा रही वैक्सीन में भी कंपनी को 10 रुपये का मुनाफा है।
अगर यह कंपनी आधी वैक्सीन भी केंद्र सरकार को देती है, तो यह लगभग 3 करोड़ वैक्सीन होती है। इस प्रकार केवल 150 रुपये में भी वैक्सीन बेचने पर कंपनी का मुनाफा करीब 30 करोड़ रुपये हो गया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हिंदुस्तान के अंदर दो कंपनियां कोविशिल्ड और कोवाक्सिन के नाम से वैक्सीन बना रही हैं। उन्होंने अनुरोध किया है कि वैक्सीन बनाने का फार्मूला लेकर दूसरी कंपनियों से साझा किया जाए। जिससे कम ससमय में भारी मात्रा में वैक्सीन तैयार की जा सके।