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Delhi: एआई के सहारे सर्जनों की खराब शीरिक मुद्राएं सुधारेगा आरएमएल, लंबी चिकित्सा क्रियाएं करती हैं परेशान

Tue, 22 Jul 2025 09:13 PM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

शोध बताते हैं कि 80 फीसदी सर्जनों को जिंदगी में कभी न कभी इनसे जुड़ी परेशानियां होती हैं।
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मौजूदा समय में रोबोटिक सर्जरी का चलन बढ़ने से समस्याएं और गंभीर हो रही हैं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लंबी सर्जरी से खराब हुईं शारीरिक मुद्राओं को डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सहारे सुधारेगा। शोध बताते हैं कि 80 फीसदी सर्जनों को जिंदगी में कभी न कभी इनसे जुड़ी परेशानियां होती हैं।
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विशेषज्ञ बताते हैं कि सर्जनों को घंटों खड़े रहकर सर्जरी करनी पड़ती है। इससे उनके गर्दन, कलाई, कमर सहित शरीर के दूसरे हिस्सों में दर्द होता है।

मौजूदा समय में रोबोटिक सर्जरी का चलन बढ़ने से समस्याएं और गंभीर हो रही हैं। इन्हीं समस्याओं की पहचान के लिए डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग ने सर्जनों के लिए एर्गोनॉमिक चुनौतियां व निवारक रणनीतियां विषय कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान एआई आधारित सॉफ्टवेयर की मदद से सर्जन की जांच की गई।

इसमें देखा गया कि किस हिस्से की मांसपेशियों में खिंचावट, दर्द या अन्य समस्या है। साथ ही सर्जन को मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं और खराब कार्य मुद्रा से बचाव के प्रति जागरूक करना व उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों को बताया गया।
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फिजियोथेरेपी की विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा सेठी ने बताया कि एआई सॉफ्टवेयर सर्जन की अलग-अलग तरीके से आंकलन करता है। इस दौरान देखा जाता है कि उनके किस हिस्से में मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं हैं। कार्यक्रम के दौरान स्थिर मुद्रा का सॉफ्टवेयर के माध्यम से डिजिटल विश्लेषण कर रिपोर्ट तैयार की गई।

समस्या का पता चलने के बाद उन्हें उचित व्यायाम के बारे में भी बताया गया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के निदेशक डॉ. अशोक कुमार ने चिकित्सा पेशेवरों की कार्य सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विवेक दीवान ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम सतत व्यावसायिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।

तैयार होंगे टूल, मिलेगी राहत
सर्जरी के दौरान इस्तेमाल होने वाले उपकरणों में बदलाव के लिए आईआईटी दिल्ली के सहयोग से आरएमएल के विशेषज्ञ काम करेंगे। डॉ. सेठी ने बताया कि सर्जरी के दौरान इस्तेमाल होने वाले उपकरण छोटे-बड़े होते हैं। आईआईटी के इंजीनियर सर्जनों से इस विषय पर बात कर उनमें बदलाव कर रहे हैं। ऐसा करने से सर्जन की समस्याएं कम होंगी। वह सर्जरी के दौरान भी शरीर को राहत दे सकेंगे।
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