-टेलीग्राम पर संपर्क कर वेबसाइटों की समीक्षा करने का देते थे काम
-बाद में बिटकॉइन की बिक्री और खरीद का काम करने पर लाभ का झांसा देकर करते थे ठगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दक्षिण पश्चिम जिला पुलिस ने घर पर काम देने का झांसा देकर ठगी करने वाले चार जालसाजों को मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से पुलिस ने चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। आरोपियों की पहचान सियापुरा यूपी निवासी अंकुर मिश्रा, राजगढ़ मध्य प्रदेश निवासी कृतार्थ, प्रेम नगर भोपाल मध्य प्रदेश निवासी विश्वास शर्मा और शिवपुरी मध्य प्रदेश निवासी केतन मिश्रा के रूप में हुई।
जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया, 27 मई को वसंत कुंज निवासी शिकायतकर्ता ने नेशनल क्राइम पोर्टल पर ठगी की शिकायत की। 23 मई को वह एक टेलीग्राम आईडी के संपर्क में आए, जिसके जरिए उन्हें घर बैठे वेबसाइटों की समीक्षा करने का काम दिया गया। प्रत्येक समीक्षा के लिए 50 रुपये देने की बात कही गई। कुछ काम करने के बाद जालसाजों ने उन्हें बिटकॉइन की खरीद -बिक्री का काम करने और उसका स्क्रीन शॉट साझा करने के लिए कहा। फिर आरोपियों ने ऐसे काम में निवेश पर मुनाफा होने का झांसा देकर पैसा जमा करने के लिए कहा। किसी न किसी बहाने से पीड़ित से 17.49 लाख की ठगी की गई। शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया।
जांच में पता चला कि कुल ठगी गई रकम में से पांच लाख रुपये शिकायतकर्ता के बैंक खाते से कोटक महिंद्रा के बैंक के एक खाते में जमा की गई थी। जो अंकुर के नाम पर पंजीकृत था। चेक के जरिए पैसे की निकासी के दौरान आरोपी दो अन्य सहयोगी के साथ दिखाई दिया। एक अन्य खाते की जांच में पता चला कि खाता आगरा में संचालित हो रहा था, जबकि खाताधारक मध्य प्रदेश का रहने वाला था। आरोपी एक साथ लखनऊ, शिवपुरी, आगरा से काम कर रहा है। इसके बाद पुलिस ने लखनऊ, भोपाल और आगरा में कई छापे मारे और चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
टेलीग्राम व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर करते थे ठग
जांच में पता चला कि जालसाज टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर राष्ट्रव्यापी धोखाधड़ी रैकेट चला रहे थे। पीड़ितों को ऑनलाइन घर से काम करने का लालच देते थे। पीड़ितों को शुरुआत में वेबसाइटों की समीक्षा जैसे साधारण काम के लिए मामूली राशि का भुगतान करते थे, फिर उन्हें बिटकॉइन की खरीद-बिक्री से जुड़े बड़े कामों में फंसा दिया जाता था। इसके बाद जालसाज विभिन्न बहानों से पीड़ितों से अतिरिक्त भुगतान की मांग करते थे।