नई दिल्ली। उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगे में घायल एक पीड़ित को मुआवजे और अस्पताल में भर्ती होने के लिए स्थानीय एसडीएम को प्रतिवेदन देने की अनुमति हाईकोर्ट ने दी है। याचिकाकर्ता ने मुआवजा न मिलने की वजह से बेहद परेशानी का सामना करने की दलील दी।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने दंगा पीड़ित एवं याचिकाकर्ता शान मोहम्मद को अनुमति दी कि वह सरकारी अस्पताल में भर्ती होने के लिए स्थानीय एसडीएम को प्रतिवेदन दे सकते हैं, ताकि उनके इलाज का खर्च कम हो सके। पीठ ने एसडीएम को निर्देश दिया कि वह इस प्रतिवेदन पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय लें। इसके बाद पीठ ने याचिका का निपटारा कर दिया।
याची के वकील राजशेखर राव ने कहा कि उनके मुवक्किल को दंगे में गोली लगी थी, लेकिन अस्पताल ने उनके जख्म को जोखिम भरा नहीं माना। इस कारण उन्हें मुआवजा नहीं मिल सका। उन्होंने मांग की कि सरकार ने दंगा पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा की थी, इसलिए उन्हें मुआवजा देने के संबंध में भी निर्देश दिए जाएं।
वकील ने कहा कि शान के पैर में गोली अभी भी है जिसे निकालने के लिए दो ऑपरेशन होने हैं। पहला ऑपरेशन गोली निकालने के लिए और दूसरा ऑपरेशन लोहे की रॉड हटाने के लिए। इसलिए उन्हें सरकार को शीघ्र मुआवजा देना चाहिए।