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दिल्ली का बजट : पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना  में 39 फीसदी बढ़ा राजस्व

Sun, 27 Mar 2022 06:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

पिछले वित्तीय वर्ष के राजस्व में आई कमी की भरपाई वर्ष 2021-22 में हो गई है। फरवरी 2022 तक सरकार ने 35,112 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 39 फीसदी अधिक है।
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डॉ. दीप्ति तनेजा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोविड महामारी के दौरान भी दिल्ली सरकार का वित्तीय प्रदर्शन बेहतर रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष के राजस्व में आई कमी की भरपाई वर्ष 2021-22 में हो गई है। फरवरी 2022 तक सरकार ने 35,112 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 39 फीसदी अधिक है। दिलचस्प यह कि जीएसटी और वैट में यह बढ़ोतरी 41.90 फीसदी रही है। बजटीय भाषण में कहा गया है कि ईमानदार प्रशासन और आधुनिक तकनीक के माध्यम से सरकार कर चोरी रोकने में सफल रही है। दूसरी तरफ सरकार नई आबकारी नीति से अतिरिक्त राजस्व का संग्रह करेगी। 

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हर साल करीब 4500 करोड़ रुपये अतिरिक्त आय का अनुमान है। वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने सदन में बताया कि उनकी सरकार ने राजस्व बढ़ाने और करदाताओं की सुविधा के लिए कई इंतजाम किए हैं। इसमें मासिक आधार पर विभाग के प्रदर्शन की निगरानी शुरू की गई है। कर विभाग में इंस्पेक्टर राज्य खत्म कर दिया है। तकनीकी विश्लेषण से मिले सुराग के आधार पर अप्रैल 2021 से फरवरी 2022 तक 156 सर्वे किए गए। सरकार को देय करीब 38.76 करोड़ रुपये का पता चला है। इसमें से 26.57 करोड़ रुपये की वसूली हो गई है। वहीं, वित्तीय वर्ष 2022-23 में सरकार को सबसे ज्यादा आय जीएसटी व वैट से होगी। 75,800 करोड़ रुपये के बजट में 62.9 फीसदी 47,700 करोड़ सीधे टैक्स से आएगा। 

2021-22 का संशोधित बजट अनुमान
2021-22 का बजट 69,000 करोड़ रुपये का था। सरकार ने शनिवार को संशोधित बजट पेश करते हुए बताया कि यह राशि 67,000 करोड़ रुपये की है। कोविड महामारी की वजह से पूंजीगत कार्यों की गति धीमी होने से संशोधित अनुमान दो हजार करोड़ कम हो गए। इस दौरान लॉकडाउन रहा और बुनियादी ढांचे से जुड़े काम बेपटरी हुए। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 468.22 करोड़ रुपये का पूरक अनुदान भी सदन से मांगा है। सिसोदिया ने बताया कि उनकी पहली सरकार बनते वक्त 2014-15 के बजट का आकार 30,940 करोड़ रुपये था। जून 2015 में पेश पहले पूर्ण बजट में उन्होंने 41,129 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट पेश किया था। बीते सात साल में इसमें इजाफा हुआ है। 
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आर्थिक विशेषज्ञ की राय में बजट : ‘पांच साल में 20 लाख नौकरियां सृजित करना होगा चुनौती’
दिल्ली सरकार ने वित्तीय सत्र 2022-23 के लिए बजट में 75,800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। सरकार ने रोजगार वाला जो बजट पेश किया है वह सुनने में बेहद अच्छा लग रहा है, लेकिन इस पर कितना क्रियान्वन हो सकेगा, यह देखना होगा। बजट मेें पांच साल में बीस लाख नौकरी सृजित करने की बात कही गई है, सरकार के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती होगी। नौकरियों का सृजन हो पाया तो यह अच्छा कदम होगा।  

सरकार जीडीपी को 10.23 फीसदी का लक्ष्य दे रही है। जिस तरह का बजट पेश किया गया है उससे लगता है कि यह लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। जीडीपी के साथ-साथ रोजगार को बढ़ा देते हैं तो दूसरी राज्य सरकारें इस पॉलिसी का अनुसरण कर सकती हैं। रोजगार नीतियों को भी बजट में रखा गया है, रोजगार ऑडिट तो एक सराहनीय कदम है। स्वास्थय क्षेत्र के लिए 9, 769 बजट प्रस्तावित किया गया है। बीते वर्ष की तुलना मेें स्वास्थय के बजट को सरकार ने कम किया है। इसका औचित्य यह है कि कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य पर ज्यादा खर्च हुआ है। लिहाजा बजट कम होने पर भी स्वास्थ्य नीतियों पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरकार बीते कई सालों से शिक्षा पर फोकस किए हुए है। 

अब तक शिक्षा में पाठ्यक्रम पर फोकस करते थे, लेकिन अब फोकस स्पोर्ट्स, योग पर भी है। इस तरह से पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद का ध्यान भी सरकार रख रही है। फूड टर्क्स और फूड हब बनाने की बात बजट में कही गई है। यह बेहतरीन कदम है, लेकिन औरतों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा होगा। सरकार को औरतों की सुरक्षा के साथ-साथ इस दिशा में भी सोचना होगा कि पुलिस दिल्ली सरकार के पास नहीं है।
- डॉ. दीप्ति तनेजा, दिल्ली कॉलेज ऑफ आट्र्स एंड कॉमर्स में अर्थशास्त्र विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर

11 लाख से अधिक लोग उठा चुके हैं फेसलेस सेवा का लाभ
परिवहन विभाग की 47 सेवाएं फेसलेस होने से 7 मार्च तक 11 लाख से अधिक लोगों को फायदा मिला है। अब लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। आजादी के बाद पहली बार मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग की उन खिड़कियों पर ताला लगाया है जहां लोग लंबी लाइनों में खड़े रहते थे। सेवाएं फेसलेस होने से परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार और बिचौलिये खत्म होने से सरकारी कार्य में पारदर्शिता काफी बढ़ी है। 

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