एम्स में रेटिनोब्लास्टोमा का गामा नाइफ रेडिएशन से होगा उपचार
-350-400 बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे, कीमोथेरेपी और आंख निकालने की नहीं पड़ेगी जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रेटिनोब्लास्टोमा (आंख का कैंसर) की बीमारी से जूझने वाले बच्चों को एम्स में गामा नाइफ रेडिएशन से उपचार मिलेगा। अब कीमोथेरेपी देने और आंख निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसको लेकर एम्स में दो बच्चों पर ट्रायल शुरू हो गया है। इन बच्चों की उम्र छह से सात वर्ष की है। इनको पहले रेटिनोब्लास्टोमा हो गया था। लेकिन उपचार के लिए अस्पताल में देरी से पहुंचे।
देश में गामा नाइफ रेडिएशन से रेटिनोब्लास्टोमा का उपचार देने वाला एम्स पहला अस्पताल होगा। एम्स में हर साल 350 से 400 बच्चे रेटिनोब्लास्टोमा के उपचार के लिए अस्पताल में पहुंचते हैं। 11 से 17 मई तक विश्व रेटिनोब्लास्टोमा जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। इस संबंध में एम्स की ओर से बुधवार को प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।
20 हजार में से किसी एक बच्चे को होती है बीमारी
एम्स नेत्र रोग विभाग में प्रो. भावना चावला ने बताया कि रेटिनोब्लास्टोमा पांच साल से कम उम्र के बच्चों को होता है। यह बीमारी 20 हजार बच्चों में से किसी एक को होती है जो आनुवंशिक है। दुनियाभर की तुलना में एक चौथाई मरीज हमारे देश में मिलते है। एम्स में हर साल रेफर होकर 350-400 बच्चे उपचार के लिए पहुंचते है। बच्चों को देखने में असुविधा, चलती हुई चीज को न देख पाना, आंखों की बनावट में बदलाव, दर्द होना, आंख में खून दिखाई देना, आंख का उभरा होना, आंख का आकार बढ़ जाना और आंखों के आसपास सूजन आ जाना इस बीमारी के लक्षण हैं।
आंख से मस्तिष्क में पहुंचने का रहता है खतरा
रेटिनोब्लास्टोमा आमतौर पर रेटिना में होता है। यह सफेद पुतली प्रतिबिंब के तौर पर दिखता है, जिसे व्हाइट आई भी कहा जाता है। यह आंख के पीछे के प्रकाश की संवेदनशील ऊतक में होता है। रेटिना में ट्यूमर हो जाता है जो पूरी आंख को प्रभावित करता है। यह आंख से मस्तिष्क में भी पहुंच सकता है। भावना चावला ने कहा कि यह एक आंख से दूसरी आंख में नहीं फैलता है। अगर मरीज को समय पर उपचार मिल जाए तो इसके ठीक होने की दर 80 फीसदी है।
गर्भावस्था में बच्चे को 50 फीसदी होने की है संभावना
एम्स मीडिया सेल की प्रमुख और एनाटॉमी विभाग में प्रो. रीमा दादा ने बताया, गर्भावस्था के दौरान 50 फीसदी में रेटिनोब्लास्टोमा होने की संभावना बढ़ जाती है। जो पुरुष 35 वर्ष से अधिक उम्र के हो चुके है और वह ध्रूमपान, शराब का सेवन करते है तो उनका डीएनए प्रभावित हो सकता है।