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जामिया हमदर्द विवि के शोधार्थियों का दावा: नीरी केएफटी में किडनी को संजीवनी देने के मिले चमत्कारी गुण

Thu, 11 Mar 2021 10:52 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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देश में हर साल लाखों मरीज किडनी की परेशानी से ग्रस्त मिलते हैं। कोरोना महामारी के दौरान सरकारें भी इन रोगियों को खास सतर्कता बरतने की सलाह दे रही हैं, क्योंकि इनमें मृत्युदर सबसे ज्यादा देखने को मिली है। ऐसे में किडनी के उपचार को लेकर आयुर्वेदिक औषधियों की भी अहम भूमिका सामने आई है। पुनर्नवा, कासनी, गोखरू, वरुण, पत्थरूपरा, पाषाणभेद, कासनी और पलाश के फूल किडनी मरीजों के लिए काफी असरदार हैं। इन्हीं औषधियों से मिलकर बनी नीरी केएफटी में शोधार्थियों को किडनी को संजीवनी देने के चमत्कारी गुण भी मिले हैं।
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नई दिल्ली स्थित जामिया हमदर्द विवि के शोधार्थियों का कहना है कि यह दवा प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (आरओएस) के प्रभाव को तेजी से कम करती हैं। फार्मास्युटिकल बायोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन में पता चला है कि अगर किसी मरीज को नीरी केएफटी दवा दी जाए तो उसके शरीर में किडनी की कोशिकाओं में मौजूद विषैले द्रव्यों को तेजी से बाहर निकालती है और उक्त मरीज की किडनी को फेल होने से भी बचाती है।

गुरुवार को विश्व किडनी दिवस से पहले शोधार्थियों ने यह अध्ययन सार्वजनिक किया है। अलग अलग समूह में किए इस अध्ययन में जहां चार औषधियों को एक समूह में रखा गया। वहीं दूसरे के लिए एमिल फार्मा के नीरी केएफटी पर अध्ययन किया। शोद्यार्थियों का कहना है कि यह किडनी विशेष के लिए सुपर एंटीऑक्सीडेंट की तरह कार्य करती है। साथ ही डाइटरी एजिस और अन्य विषाक्त द्रव्यों से भी बचाव करती है।
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इस पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद विभागाध्यक्ष डॉ. केएन द्विवेदी का कहना है कि किडनी के उपचार में नीरी केएफटी एक चमत्कार की तरह कार्य करती है। उनके पास हजारों मरीजों की जानकारी है जिन्हें इससे लाभ मिला है। वहीं मेदांता अस्पताल में मेडिसिन आयुर्वेद निदेशक डॉ. भीमा भट्ट ने बताया कि किडनी मरीजों में नीरी केएफटी के जरिए क्रिएटिनिन को जल्द ही नियंत्रित किया जा सकता है। हर दिन इसका मरीजों में लाभ मिल रहा है।

जामिया हमदर्द विवि के शोधार्थियों के अनुसार किडनी मरीजों के उपचार में प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियां यानि आरओएस को नियंत्रित करना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि इन्हीं की वजह से किडनी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है। अध्ययन में पुनर्नवा, वरुण, रेवंड चीनी व कमल चार औषधियों को शामिल किया। साथ ही नीरी केएफटी को भी एक समूह में रखा गया। शोध के दौरान नौ समूहों को आठ दिन तक अलग-अलग उपचार दिया। इस दौरान पता चला कि जिस समूह को नीरी केएफटी दी जा रही थी, उनमें आरओएस की मात्रा सबसे जल्दी नियंत्रण में आई है।
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