नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर किसान पिछले दो महीनों से दिल्ली से सटे सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए कानून की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. इस बीच एक हिंदी न्यूज चैनल से बातचीत में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि एमएसपी के लिए सरकार उनके पिता महेंद्र टिकैत के फॉर्मूले को लागू करे। फॉर्मूले के मुताबिक 3 क्विंटल गेहूं की कीमत 1 तोले सोने के बराबर होनी चाहिए।
बातचीत के दौरान राकेश टिकैत ने कहा कि 1967 में भारत सरकार ने गेहूं की एमएसपी 76 रुपये प्रति क्विंटल तय की थी। उस वक्त प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों की सैलरी 70 रुपये महीने थी। वह एक महीने की सैलरी से एक क्विंटल गेहूं नहीं खरीद सकते थे। जबकि, एक क्विंटल गेहूं की कीमत से ढाई हजार ईंट खरीद सकते थे। उस वक्त 30 रुपये की 1 हजार ईंटें आती थीं।
अभी एक तोले सोने की कीमत लगभग 48 हजार
राकेश टिकैत ने कहा कि तीन क्विंटल गेहूं की कीमत एक तोले सोने के बराबर होनी चाहिए। अभी 24 कैरेट के एक तोले सोने की कीमत करीब 48 हजार रुपये है, जबकि गेहूं का समर्थन मूल्य 1975 रुपये प्रति क्विंटल है।
एक तोला सोना के लिए देना पड़ता था तीन क्विंटल गेहूं
उन्होंने कहा कि उस वक्त 200 रुपये प्रति तोला सोना मिलता था, जिसके लिए तीन क्विंटल गेहूं देना पड़ता था। अर्थात तीन क्विंटल गेहूं से एक तोला सोना खरीदा जाता था। उन्होंने कहा कि अब हमको तीन क्विंटल गेहूं के बदले एक तोला सोना दे दो। जितनी कीमत और चीजों की बढ़ी है, उतनी ही गेहूं की भी बढ़नी चाहिए।
एक किलो गेहूं की कीमत होगी 160 रुपये
अगर सोने की कीमत के साथ तुलना करेंगे तो एक क्विंटल गेहूं का दाम करीब 16 हजार रुपये होगा, जो मौजूदा एमएसपी से 8 गुना अधिक है। इस हिसाब से एक किलो गेहूं की कीमत करीब 160 रुपये होगी।
आंदोलन का मुख्य चेहरा बने राकेश टिकैत
26 जनवरी को हिंसा के बाद गाजीपुर बॉर्डर पर संभावित पुलिस कार्रवाई से पहले भावुक होने वाले टिकैत अब आंदोलन का मुख्य चेहरा बन गए हैं।