कोविड महामारी खत्म होने के बाद एक बार फिर ट्रेन में भीड़ बढ़ गई है। इसके साथ टिकट दलाल भी सक्रिय हो गए है। आईआरसीटीसी के अधिकृत एजेंट भी आरक्षित टिकट दिलाने के नाम पर दलाली में संलिप्त है। इसका भंडाफोड़ रेलवे सुरक्षा बल ने किया है।
लंबी दूरी की ट्रेन सेवाओं की बहाली और गर्मी के दिनों में आरक्षित ट्रेन सीटों की मांग बढ़ जाती है। साथ ही टिकट दला भी सक्रिय हो जाते हैं। इसे ही देखते हुए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने टिकट दलालों के खिलाफ अभियान को तेज कर दिया है।
देश में दलालों की गतिविधियों के खिलाफ एक देशव्यापी अभियान ऑपरेशन उपलब्ध चलाया जा रहा है। इसके तहत आरपीएफ की टीम डिजिटल और साइबर दुनिया से जानकारी इकट्ठा कर फिर उसपर दबिश बना रही है। सूचनाओं का मिलान, सत्यापन और विश्लेषण कर टिकट दलालों को दबोचा जा रहा है।
आरफीएफ ने अपने अभियान के तहत 1459 टिकट दलालों को गिरफ्तार किया है। इसमें 341 अधिकृत आईआरसीटीसी एजेंट शामिल थे। ये एजेंट रेलवे टिकटों की दलाली में भी शामिल थे। इन आईआरसीटीसी एजेंटों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार 366 आईआरसीटीसी एजेंटों की आईडी और 6751 व्यक्तिगत आईडी को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अवैध रूप से खरीदे गए 65 लाख रुपये से अधिक मूल्य की भविष्य की यात्रा के रेलवे टिकटों को बरामद कर रद्द कर दिया गया है, जिससे ये सीटें सही मायने में हकदार रेलवे यात्रियों को उपलब्ध हो गईं हैं।
आरपीएफ ने आम जनता को अनाधिकृत व्यक्तियों से टिकट नहीं खरीदने की सलाह दी है। क्योंकि यह न केवल एक बार पता चलने के बाद रद्द हो सकता है, बल्कि टिकट लेने वाले को कानूनी परेशानी में भी डाल सकता है।
त्योहारों के समय आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर सबसे अधिक सक्रिय रहते है
त्योहार के समय पर आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर सबसे अधिक टिकट के दलाल सक्रिय हो जाते है। पूर्वांचल दिशा में जाने वाली ट्रेनों में ऑन डिमांड टिकट उपलब्ध कराते है। इसी तरह निजामुददीन रेलवे स्टेशन पर भी इनकी सक्रिया अधिक रहती है।
आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार ऑन लाइन टिकट के लिए ऐसा सॉफ्टवेयर का इजाद किए है जो वन टाइम पासवर्ड को भी बाइपास कर देते है। फरवरी महीने की तुलना में मार्च में एक हजार अधिक टिकट दलालों को आरपीएफ की टीम ने धरा है।