नागरिकता संशोधन अधिनियम, एनपीआर और एनआरसी को लेकर अल्पसंख्यक वर्ग में नाराजगी बरकरार है। उसे लग रहा है कि इस कानून से उसकी देशभक्ति पर सवाल उठाये जा रहे हैं। इसी देश की मिट्टी में 70 साल गुजारने के बाद अब उनसे भारतीय होने का सबूत मांगा जा रहा है। उनकी इस नाराजगी का परिणाम ही शाहीन बाग जैसे प्रदर्शनों के रूप में सामने आ रहा है।
CAA के प्रदर्शनकारियों को अपना समर्थन कर रहे स्थानीय निवासी निहाल अहमद ने बताया कि अगर भाजपा को यह लग रहा है कि वह शाहीन बाग को मुद्दा बनाकर दिल्ली विधानसभा चुनाव जीत जाएगी, तो यह उसकी भारी भूल है।
मुस्लिम समुदाय के बीच इस बात की आशंका है कि सरकार CAA के बाद जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की तैयारी कर रही है। अगर सरकार ऐसी कोशिश करती है तो इस पर समाज की प्रतिक्रिया क्या होगी, इस मुद्दे पर समाज के अलग-अलग लोगों के विचार अलग-अलग हैं। मंसूर आलम खान कहते हैं कि यह अच्छी बात है।
वह कहते हैं, किसी भी देश की सबसे बड़ी समस्या बढ़ती जनसंख्या बन चुकी है, इसलिए अगर सरकार ऐसा कोई कानून लाती है, तो वे उसका स्वागत करेंगे। लेकिन इसके पहले सरकार को लोगों की रोजी-रोटी और शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए।
लेकिन इसी मुद्दे पर नसीर अहमद के विचार बिलकुल अलग हैं। वे कहते हैं कि कोई भी आधुनिक पढ़ा-लिखा परिवार अब ज्यादा बच्चे नहीं पैदा करना चाहता, वह चाहे हिन्दू समाज से हो या मुस्लिम। इसलिए सरकार को लोगों की शिक्षा और रोजगार का ध्यान करना चाहिए।
शिक्षा के प्रसार से जनसंख्या की समस्या स्वयं ही खत्म हो जाएगी। लेकिन अगर सरकार बिना सोचे-समझे जनसंख्या नियंत्रण कानून ले आती है, तो इससे कुछ लोगों को समाज को बहकाने का मौका मिल जाएगा। उसका CAA की तर्ज पर बड़ा विरोध होगा और इससे देश घोर संकट में फंस सकता है।