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पाकिस्तान को मजा चखा कर देशभक्ति का 'सबूत' देना चाहते हैं शाहीन बाग में बैठे प्रदर्शनकारी

Fri, 07 Feb 2020 04:28 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शाहीन बाग प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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नागरिकता संशोधन अधिनियम, एनपीआर और एनआरसी को लेकर अल्पसंख्यक वर्ग में नाराजगी बरकरार है। उसे लग रहा है कि इस कानून से उसकी देशभक्ति पर सवाल उठाये जा रहे हैं। इसी देश की मिट्टी में 70 साल गुजारने के बाद अब उनसे भारतीय होने का सबूत मांगा जा रहा है। उनकी इस नाराजगी का परिणाम ही शाहीन बाग जैसे प्रदर्शनों के रूप में सामने आ रहा है।

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शाहीन बाग को राष्ट्रविरोधी सोच के लोगों का जमावड़ा करार दिए जाने से अल्पसंख्यक वर्ग में नाराजगी भी बढ़ रही है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि अगर सरकार को उनकी देशभक्ति पर शक है, तो उसे एक मुस्लिम रेजीमेंट की स्थापना करनी चाहिए। इस रेजिमेंट में केवल मुस्लिम युवाओं की भर्ती कर उन्हें पाकिस्तान बॉर्डर पर भेजना चाहिये। वे पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए तैयार हैं।
 
बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले मंसूर आलम खान ने बताया कि वे शाहीन बाग के विरोध प्रदर्शन को सपोर्ट करने के लिए यहां आए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का नाम लेकर हिंदुस्तान के मुस्लिमों को निशाना बनाया जाता है। लेकिन अगर सरकार को मुसलमानों के ईमान को परखना है, तो स्पेशल मुस्लिम रेजीमेंट बनाकर उसे पाकिस्तानी बॉर्डर पर भेजा जाए। इस देश का मुसलमान यह साबित कर देगा कि उसका ईमान किसके साथ है।

शाहीन बाग का मुद्दा उछालकर नहीं जीतेगी भाजपा

CAA के प्रदर्शनकारियों को अपना समर्थन कर रहे स्थानीय निवासी निहाल अहमद ने बताया कि अगर भाजपा को यह लग रहा है कि वह शाहीन बाग को मुद्दा बनाकर दिल्ली विधानसभा चुनाव जीत जाएगी, तो यह उसकी भारी भूल है।

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उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव संविधान को मजबूत करने की लड़ाई है, तो शाहीन बाग का प्रदर्शन संविधान बचाने की लड़ाई है। उनके लिए दोनों ही जरूरी हैं और वे दोनों ही मोर्चों पर डटकर लड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि देर-सबेर सरकार को इस बात को समझना पड़ेगा। यह मुद्दा जितना लंबा खिंचेगा, उससे देश-विरोधी ताकतों को ही बढ़ावा मिलेगा, इसलिए सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान निकाले और विवादित कानून को वापस ले।

जनसंख्या नियंत्रण कानून पर भी राजी!

मुस्लिम समुदाय के बीच इस बात की आशंका है कि सरकार CAA के बाद जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की तैयारी कर रही है। अगर सरकार ऐसी कोशिश करती है तो इस पर समाज की प्रतिक्रिया क्या होगी, इस मुद्दे पर समाज के अलग-अलग लोगों के विचार अलग-अलग हैं। मंसूर आलम खान कहते हैं कि यह अच्छी बात है।

वह कहते हैं, किसी भी देश की सबसे बड़ी समस्या बढ़ती जनसंख्या बन चुकी है, इसलिए अगर सरकार ऐसा कोई कानून लाती है, तो वे उसका स्वागत करेंगे। लेकिन इसके पहले सरकार को लोगों की रोजी-रोटी और शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए।
 
लेकिन इसी मुद्दे पर नसीर अहमद के विचार बिलकुल अलग हैं। वे कहते हैं कि कोई भी आधुनिक पढ़ा-लिखा परिवार अब ज्यादा बच्चे नहीं पैदा करना चाहता, वह चाहे हिन्दू समाज से हो या मुस्लिम। इसलिए सरकार को लोगों की शिक्षा और रोजगार का ध्यान करना चाहिए।

शिक्षा के प्रसार से जनसंख्या की समस्या स्वयं ही खत्म हो जाएगी। लेकिन अगर सरकार बिना सोचे-समझे जनसंख्या नियंत्रण कानून ले आती है, तो इससे कुछ लोगों को समाज को बहकाने का मौका मिल जाएगा। उसका CAA की तर्ज पर बड़ा विरोध होगा और इससे देश घोर संकट में फंस सकता है।

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