फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नए सांसदों के गुरु की भूमिका में रहते थे प्रणब दा, केंद्र की ही नहीं दिल्ली की राजनीति में भी रखते थे रुची

Tue, 01 Sep 2020 01:36 AM IST
नोएडा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
प्रणब मुखर्जी - फोटो : PTI
विज्ञापन

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी केंद्र ही नहीं, दिल्ली की राजनीति में भी रुचि रखते थे। वे कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व के लिए कई बार खेवनहार की भूमिका में भी रहे। संसद में दिल्ली के नेता जब भी जीत कर पहुंचते थे तो वह उन्हें संसदीय प्रक्रिया से पूरी तरह अवगत कराते। सलाहकार की भूमिका में भी बराबर दिल्ली के नेताओं के साथ रहते थे। राष्ट्रपति बनने के बाद पार्टी लाइन से हटकर सभी दल के नेताओं से मिलते और राजनीति पर चर्चा के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभव को भी साझा करते थे। प्रणब मुखर्जी के साथ बिताए पलों को याद करते हुए दिल्ली से 1984 में जीत कर संसद पहुंचे जयप्रकाश अग्रवाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने अमर उजाला के साथ साझा की।

विज्ञापन


दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि जब वह पहली बार चुनाव जीत कर संसद पहुंचे तो प्रणब मुखर्जी ने उन्हें संसद की सभी प्रक्रियाओं से अवगत कराया। संसद कैसे चलता है, सदस्यों को कौन से नियमों का पालन करना होता है। इन सब बिंदुओं पर विस्तार से समझाया। जो भी नए सदस्य संसद पहुंचते थे उन्हें वह गाइड करते थे। दिल्ली कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रहने के दौरान जब भी कोई मुसीबत आती थी तो वह उससे निकालने के लिए हल ढूंढते थे। समय-समय पर सलाह देते थे और राजनीति की गुढ़ बातों से अवगत कराते थे। वर्ष 2014 तक संसद में उनका साथ रहा। संसद में जब वह बोलते थे तो सभी तन्मयता से सुनते थे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद विजय गोयल ने बताया कि प्रणब पार्टी लाइन से अलग हटकर बात करने वालों में से थे। मंत्री पद के लिए शपथ कराते वक्त भी उनका पूरा स्नेह था। स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन रहने के दौरान जब लॉटरी बंद करने की बात सामने आई तो उनसे नोकझोंक भी हुई। विवाद भी मुद्दों पर होता था, बावजूद इसके वह मुझसे स्नेह रखते थे। वह बंगाल से थे इस वजह से विजॉय कहकर पुकारते थे। राष्ट्रपति भवन में जब उनसे मुलाकात होती थी तो तत्कालीन सरकार के कामकाज पर भी चर्चा करते थे। राजनीति ही नहीं वे अपने राजनीतिक जीवन के उतार-चढ़ाव पर भी चर्चा करने में हिचक नहीं रखने वालों में से थे। पूरा जीवन वृतांत सुना डालते थे। कुशल प्रशासक, राजनीतिज्ञ व अर्थशास्त्री थे।
विज्ञापन


अपना भाषण खुद तैयार करते थे
पूर्व राष्ट्रपति जब भी देश की जनता को संबोधित करते थे तो अपना भाषण खुद ही तैयार करते थे। लाइव रिकार्डिंग नहीं होने के बावजूद वह पूरी तैयारी के साथ भाषण को रिकॉर्ड करते थे। मुखर्जी के करीबी बताते हैं कि राष्ट्रपति भवन में वह अपने अभिभाषण को कई बार पढ़ते थे और उसके एक-एक शब्द पर ध्यान देते थे। इसमें वह कभी भी किसी की मदद नहीं लेने वालों में से थे। राष्ट्रपति भवन में रहने वाले सभी लोगों से प्रेम भाव से मिलते-जुलते थे।

विज्ञापन

दिल्ली सरकार के स्कूल में बच्चों के शिक्षक बने थे दादा

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को दिल्ली सरकार के एक स्कूल मेें उनके शिक्षक बनने को हमेशा याद किया जाएगा। वर्ष 2015 मेें शिक्षक दिवस से एक दिन पहले चार सितंबर को वह प्रजिडेंशियल एस्टेट में मौजूद डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सर्वोदय विद्यालय में शिक्षक की भूमिका में नजर आए थे। उन्होंने बच्चों को राजनीतिक इतिहास की शिक्षा दी थी। साथ ही अपने जीवन के अनुभव भी बताए। दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के कहने पर उन्होंने यह भूमिका निभाई थी।

उन्होंने बच्चों से कहा था कि वह उन्हें मुखर्जी सर कह सकते हैं। पॅालिटिकल हिस्ट्री ऑफ इंडिया की इस क्लास में उन्होंने बच्चों को कठिन परिश्रम करने व लक्ष्य पर ध्यान देने की शिक्षा दी थी। करीब 55 मिनट की कक्षा में देश के राजनीतिक इतिहास के विषय में उन्होंने बताया। क्लास लेने के बाद वह 150 शिक्षकों से भी रूबरू हुए। थे। उन्होंने शिक्षकों को नसीहत दी थी कि वह बच्चों के के लिए मेहनत करेंगे तो निश्चित तौर पर आगे बढ़ेंगे।

छात्रों से अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने बताया था कि मां उनकी पहली शिक्षक रही हैं। मां ने उन्हें मेहनत कर लक्ष्य प्राप्त करने की नसीहत दी थी। अपना उदाहरण देते हुए बच्चों से कहा कि लोकतंत्र गरीब को भी ऊंचा उठने का मौका देता है। इसका प्रमाण है कि कैसे गांव का एक लड़का रायसिना हिल्स तक पहुंचा। प्रणब दा ने बताया कि राजनीति में आने सेे पहले वह शिक्षक थे और अब 45 साल बाद फिर से शिक्षक बने हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें