पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को दिल्ली सरकार के एक स्कूल मेें उनके शिक्षक बनने को हमेशा याद किया जाएगा। वर्ष 2015 मेें शिक्षक दिवस से एक दिन पहले चार सितंबर को वह प्रजिडेंशियल एस्टेट में मौजूद डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सर्वोदय विद्यालय में शिक्षक की भूमिका में नजर आए थे। उन्होंने बच्चों को राजनीतिक इतिहास की शिक्षा दी थी। साथ ही अपने जीवन के अनुभव भी बताए। दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के कहने पर उन्होंने यह भूमिका निभाई थी।
उन्होंने बच्चों से कहा था कि वह उन्हें मुखर्जी सर कह सकते हैं। पॅालिटिकल हिस्ट्री ऑफ इंडिया की इस क्लास में उन्होंने बच्चों को कठिन परिश्रम करने व लक्ष्य पर ध्यान देने की शिक्षा दी थी। करीब 55 मिनट की कक्षा में देश के राजनीतिक इतिहास के विषय में उन्होंने बताया। क्लास लेने के बाद वह 150 शिक्षकों से भी रूबरू हुए। थे। उन्होंने शिक्षकों को नसीहत दी थी कि वह बच्चों के के लिए मेहनत करेंगे तो निश्चित तौर पर आगे बढ़ेंगे।
छात्रों से अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने बताया था कि मां उनकी पहली शिक्षक रही हैं। मां ने उन्हें मेहनत कर लक्ष्य प्राप्त करने की नसीहत दी थी। अपना उदाहरण देते हुए बच्चों से कहा कि लोकतंत्र गरीब को भी ऊंचा उठने का मौका देता है। इसका प्रमाण है कि कैसे गांव का एक लड़का रायसिना हिल्स तक पहुंचा। प्रणब दा ने बताया कि राजनीति में आने सेे पहले वह शिक्षक थे और अब 45 साल बाद फिर से शिक्षक बने हैं।