फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Campaign : उम्मीद की मशाल- बच्चों को पढ़ाई के साथ प्रकृति से भी जोड़ रही हैं प्रगति चासवाल

Mon, 16 May 2022 04:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

प्रगति मिनी खेत के माध्यम से 25 हजार से अधिक बच्चों को दे चुकी हैं शिक्षा। दिल्ली के 15 सरकारी व निजी स्कूलों में अपने इस अभियान को बढ़ा रही हैं।
विज्ञापन
स्कूल के बच्चों के साथ प्रगति... - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रकृति को लेकर पुस्तकों में बहुत से पाठों को जोड़ा गया है। हालांकि, धरातल पर बच्चों को प्रकृति से जोड़ने के लिए बहुत कम ही प्रायोगिक कक्षाएं होती हैं। दिल्ली के साकेत निवासी प्रगति चासवाल ने बच्चों को शिक्षा देने के साथ उन्हें प्रकृति के साथ भी जोड़ने का जिम्मा उठाया है। प्रगति अब तक 25 हजार से अधिक बच्चों को मिनी खेती करने के साथ प्रकृति से जोड़ चुकी हैं और दिल्ली के 15 सरकारी व निजी स्कूलों में अपने इस अभियान को बढ़ा रही हैं।

विज्ञापन


प्रगति चासवाल ने बताया कि वर्ष 2017 में उन्हें यह तब महसूस हुआ, जब उन्हें एक बेटा हुआ। उन्हें चिंता होती थी कि वह कैसे अपने बेटे को अच्छा व पौष्टिक खाना उपलब्ध करा सकती हैं। इसके लिए उन्होंने कुछ विशेषज्ञों से सलाह लेकर अपनी छत पर ऑर्गेनिक फॉर्मिंग शुरू की। शुरुआत में जब फल व सब्जियां उनकी छत पर उपजे तो लोगों ने विश्वास नहीं किया। इसके बाद लोगों ने ऑर्गेनिक फॉर्मिंग को लेकर उनसे गुर सीखे। 

ऐसे में उन्होंने इस पहल को हर बच्चे के लिए शुरू करने की योजना बनाई। इसके लिए उन्होंने सॉगुड लर्निंग फार्म की 2017 में स्थापना की, जिसका उद्देश्य बच्चों को एक उत्पादक और कार्य आधारित शैक्षणिक दृष्टिकोण प्रदान करना था। इसके तहत शिक्षक और बच्चों को अपने स्वयं के जैविक भोजन और स्वस्थ खाने की आदतों के विकास की मूल बातें सिखाई जाती हैं। 
विज्ञापन


2017-2018 में प्रगति ने लगभग 200 बच्चों के साथ दिल्ली सरकार के एक स्कूल में एक पायलट की शुरुआत की थी। 2018-2019 तक प्रगति को अच्छी प्रतिक्रिया मिली और अतिरिक्त साझेदारी के माध्यम से 1200 से अधिक बच्चों तक पहुंचने में उन्हें मदद मिली। 2019 में उन्होंने कुछ स्कूलों में कार्यक्रम शुरू किया और दिल्ली-एनसीआर व उसके आसपास के सरकारी और निजी स्कूलों की मांगों के आधार पर आगे बढ़ना जारी रखा।

टीम करती है यह काम
प्रगति की टीम शिक्षकों के साथ गणित, विज्ञान व सामाजिक विज्ञान आदि की विभिन्न अवधारणाओं को पाठ्यचर्या नियोजन और कृषि यंत्रों को डिजाइन करने में एकीकृत करने के लिए काम करती है। वह अब तक 25 हजार से अधिक बच्चों को जैविक खेती के बारे में शिक्षा दे चुकी हैं। इसमें से करीब 9 हजार बच्चों को ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा प्रदान की गई है। प्रगति नई दिल्ली के घिटोरनी इलाके में फार्म संचालित करती हैं, जहां बच्चे प्रकृति से जुड़े रहने के लिए खेती की गतिविधियों में भाग लेने आते हैं। जमीन के एक छोटे से टुकड़े जिसे मिनी खेत भी कहा जाता है, पर काम करते हुए बच्चों को अपना भोजन खुद उगाने में मदद मिलती है। यहां बच्चों को मिट्टी तैयार करने से लेकर फसल बोने के बारे में शिक्षा दी जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें