-डीपीसीसी की रिपोर्ट के हुआ खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की जून माह की जल गुणवत्ता रिपोर्ट में यमुना नदी की स्थिति चिंताजनक पाई गई है। मई की तुलना में जून में अधिकांश निगरानी स्थलों पर फीकल कोलीफॉर्म का स्तर बढ़ा है, जो नदी में बिना उपचारित सीवेज के अधिक मिलने का संकेत है। बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर भी तय मानकों से काफी अधिक रहा।
डीपीसीसी यमुना के आठ स्थानों पर निगरानी करता है। जून में हिंडन कट को छोड़कर अन्य सभी स्थलों पर गिरावट दर्ज की गई। असगरपुर में फीकल कोलीफॉर्म 3.90 लाख एमपीएन/100 एमएल पहुंच गया, जबकि ओखला बैराज पर 1.10 लाख एमपीएन/100 एमएल दर्ज किया गया। दोनों निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक। पल्ला, वजीराबाद, आईएसबीटी, आईटीओ व निजामुद्दीन ब्रिज पर भी वृद्धि दर्ज की गई।
बीओडी का स्तर तीन से 64 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच रहा, जबकि मानक अधिकतम तीन मिलीग्राम है। सबसे अधिक बीओडी असगरपुर (64 मिलीग्राम) में पाया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि छह सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पर्यावरणीय मानकों पर खरे नहीं उतरे। यमुना विहार फेज-3 में फीकल कोलीफॉर्म 7,900 (स्वीकृत 230), महरौली में 16,000, घिटोरनी व वसंत कुंज में भी निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक पाया गया।