अदालत ने दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी शरजील इमाम की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सर्वोच्च द्वारा हाल ही में दिए आदेश के मद्देनजर उन्होंने यह याचिका दायर की है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार द्वारा प्रावधान पर पुनर्विचार करने तक राजद्रोह कानून को स्थगित रखा है।
कड़कड़डूमा अदालत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष सुनवाई तय थी लेकिन उनके अवकाश पर होने के लिए लिंक न्यायाधीश ने पुलिस को 6 जून तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
शरजील ने अपने खिलाफ प्राथमिकी में अंतरिम जमानत की मांग की है। उस पर देशद्रोह का अपराध शामिल है। प्राथमिकी नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ दिल्ली के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया इलाके में उनके द्वारा दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है। ट्रायल कोर्ट ने हाल ही में शरजील को जमानत देने से इनकार कर दिया था। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद हाईकोर्ट ने शरजील को पुन: ट्रायल कोर्ट में आवेदन दायर करने को कहा है।
याचिका में कहा गया है कि इमाम को लगभग 28 महीने तक जेल में रखा गया है, जबकि अपराधों के लिए अधिकतम सजा, जिसमें 124-ए आईपीसी शामिल नहीं है अधिकतम 7 साल की कैद की सजा है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद देशद्रोह के मुद्दे पर विचार नहीं किया जा सकता। वर्तमान में वह किसी भी गवाह को प्रभावित करने या किसी सबूत से छेड़छाड़ करने की स्थिति में नहीं है।
अदालत ने इमाम के खिलाफ धारा 124ए (देशद्रोह), 153ए (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 153बी (आरोप, राष्ट्रीय-एकीकरण के लिए पूर्वाग्रही दावे), 505 (बयानबाजी के लिए अग्रणी बयान) के तहत आरोप तय किए थे।