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दिल्ली: यमुना किनारे की जमीन पर डीडीए को कब्जा से रोकने संबंधी याचिका खारिज, फसल को नुकसान के बदले मुआवजा नहीं

Sun, 06 Feb 2022 09:33 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

उच्च न्यायालय ने कहा कि सोसाइटी के सदस्यों ने दिसंबर, 2019 तक इस क्षेत्र को खाली करने का सुप्रीम कोर्ट को वचन दिया था, इसका भी उल्लंघन है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को यमुना के किनारे की जमीन पर कब्जा लेने से रोकने संबंधी (यमुना बैंक किसान बचाओ मोर्चा) की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय ने इसे जमीन पर कब्जा जमाने का प्रयास करार दिया है। रिकॉर्ड का हवाला देते हुए इसमें कहा गया है कि याचिकाकर्ता के सदस्यों ने गैरकानूनी तौर पर जमीन पर कब्जा जमाया हुआ है। इसलिए फसल को नुकसान पहुंचाने के एवज में डीडीए से मुआवजा के लिए योग्य नहीं है।

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उच्च न्यायालय ने कहा कि सोसाइटी के सदस्यों ने दिसंबर, 2019 तक इस क्षेत्र को खाली करने का सुप्रीम कोर्ट को वचन दिया था, इसका भी उल्लंघन है। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने इस याचिका को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग और याचिकाकर्ताओं द्वारा जमीन पर बने रहने की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं। पहले ही अनधिकृत कब्जाधारियों ने इस क्षेत्र में अतिक्रमण किया हुआ है।
  
उच्च न्यायालय ने कहा कि चूंकि सोसाइटी का दावा है कि उनके सदस्य किसान हैं, इसलिए अदालत ने याचिकाकर्ता पर वित्तीय भार लगाने के बजाय इसे खारिज कर दिया। याचिका से पता चलता है कि याचिकाकर्ता उस भूमि में फसल उगा रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 2015 के आदेश के तहत प्रतिबंधित है।
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सोसाइटी ने अपनी याचिका में कहा कि इसमें ऐसे किसान शामिल हैं जो 100 साल से अधिक समय से यमुना नदी के तट पर करीब पांच हजार बीघा जमीन पर खेती कर रहे थे। सदस्यों के पास 1932 से 2012 तक 'लगान' का प्रमाण भी है कि किसान इस क्षेत्र में मूली, बैगन, आलू और प्याज उगाते रहे हैं। उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बगैर भूमि से वंचित नहीं किया जा सकता है।

याचिका में कहा गया है कि 8 नवंबर, 2020 को डीडीए के अधिकारी 'जमीन' पर कब्जा करने के इरादे से स्थानीय लोगों को बेदखल करने के लिए बेला एस्टेट में अर्थ-मूविंग मशीनों और पुलिस के साथ एकत्रित हुए थे। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की तरफ से प्रतिनिधित्व करते हुए अधिवक्ता प्रभ सहाय कौर ने कहा कि एनजीटी ने माना था कि यमुना के मैदानी क्षेत्र की रक्षा होनी चाहिए और वहां किसी तरह के अतिक्रमण की अनुमति नहीं है। 

डीडीए को यमुना नदी और आसपास के बाढ़ के मैदानी क्षेत्रों की रक्षा की जिम्मेवारी सौंपी गई है। इसके तहत ही यमुना बाढ़ के मैदानों को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए डीडीए की तरफ से नियमित रूप से कार्रवाई की जाती है।

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