दिल्ली उच्च न्यायालय ने गणतंत्र दिवस पर किसानों की परेड के बेकाबू हो जाने का अनुमान नहीं लगा पाने और उन्हें नियंत्रित नहीं कर पाने की याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में पुलिस एवं खुफिया अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया गया था। हाईकोर्ट ने सोमवार को जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता पर दस हजार (10,000) रूपये का जुर्माना लगाया है।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने यह कहते हुए जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया कि अदालत के लिए इस मामले में हस्तक्षेप करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि पुलिस ने 26 जनवरी की घटना के सिलसिले में प्राथमिकियां दर्ज की हैं।
लाल किले पर लगाया था धार्मिक ध्वज
बता दें कि नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग के समर्थन में राष्ट्रीय राजधानी में 26 जनवरी को निकाली गई ट्रैक्टर रैली अराजक हो गई थी। हजारों प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह बैरिकेडिंग हटा दिये थे। वे पुलिसकर्मियों के साथ भी भिड़ गये थे। उन्होंने वाहन भी पलटा दिये थे और लाल किले पर धार्मिक ध्वज लगा दिया था।
याचिकाकर्ता पर लगाया दस हजार का जुर्माना
याचिकाकर्ता एनजीओ ‘दिल्ली सिटीजन फोरम फोर सिविल राईट्स’ के अध्यक्ष जोगिंदर तुली ने पुष्टि की कि अदालत ने 10,000 रूपये का जुर्माना लगाकर याचिका खारिज कर दी। एनजीओ ने याचिका में दावा किया था कि सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक की वजह से यह घटना हुई थी और लाल किले पर किसानों ने तिरंगे के बजाय एक धार्मिक ध्वज फहराकर राष्ट्र ध्वज का अपमान किया था।