नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने निजामुद्दीन क्षेत्र में सुंदर नर्सरी में वाहनों के प्रवेश और पार्किंग बंद करने के मुद्दे पर पर्यावरण मंत्रालय, दिल्ली सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुगल पवेलियन के करीब बने गुंबद और वाहनों के उत्सर्जन से प्रदूषण के कारण प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, दिल्ली सरकार, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी), एएसआई, विश्व धरोहर स्थल के ट्रस्टियों, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) और आगा खान विकास नेटवर्क को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए।
याची वकील बिन्नी कालरा ने याचिका में कहा कि हुमायूं के मकबरे से सटे 16वीं सदी के हेरिटेज पार्क परिसर में दो साल पहले आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर द्वारा सौंदर्यीकरण का काम होने के एक दशक बाद सुंदर नर्सरी आम जनता के लिए खोली गई थी। उन्होंने कहा कि यूनेस्को ने 2016 में नर्सरी को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।
उन्होंने कहा कि आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के सहयोग से सुंदर नर्सरी को फिर से विकसित करने के लिए एक समझौता किया था। उन्होंने कहा कि तय नियमों का उल्लंघन कर नर्सरी में कई पार्किंग स्थल बनाए जा रहे हैं जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा नीला गुंबद के पास बड़े पैमाने पर पार्किंग स्थल बनाए जा रहे हैं जिसमें पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई कर विनाश को बढ़ावा दिया जा रहा है। पहले पौधों की खरीद के उद्देश्य से नर्सरी संचालित करने वाले सीपीडब्ल्यूडी के काम के घंटों के दौरान केवल 9 बजे से शाम 4 बजे तक वाहनों के प्रवेश की अनुमति दी गई थी, लेकिन अब पूरा दिन वाहनों का जमघट लग रहा है। इतना ही नहीं वहां रेस्तरां तक खोलने की इजाजत प्रदान कर दी गई है।
याचिका में अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे सुंदर नर्सरी में राष्ट्रीय पक्षी मोर, अन्य एविफाइंस और जैव विविधता के प्राकृतिक आवास को खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों को बंद करें। उन्होंने कहा कि सुंदर नर्सरी एक हेरिटेज पार्क है और यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल निजामुद्दीन में हुमायूं के मकबरे का विस्तार है। अदालत ने मामले की सुनवाई 25 मार्च तय की है।