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कोर्ट में हलफनामा देने के बाद लोगों ने मर्जी से किया धर्मांतरण

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नई दिल्ली। लखनऊ एटीएस द्वारा धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार मौलाना मोहम्मद उमर गौतम और जहांगीर आलम कासमी के परिजन आरोपों को बेबुनियाद बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि न तो लालच देकर और न ही बहला-फुसलाकर किसी का धर्मांतरण कराया है। जिन लोगों ने धर्म परिवर्तन किया है उन्होंने बाकायदा कोर्ट में हलफनामा देकर इसकी सूचना दी और बाद में अपना धर्म परिवर्तन किया। उधर, सोमवार दोपहर बटला हाउस स्थित मौलाना उमर गौतम के इस्लामिक दावाह सेंटर (आईडीसी) पर ताला लटका मिला। हालांकि सुबह 11 बजे उनका दफ्तर खुला था। दिल्ली पुलिस की एक टीम जांच के लिए उनके दफ्तर पहुंची थी। उस समय कुछ लोग वहां मौजूद थे। पुलिस के जाते ही सभी ताला लगाकर रफूचक्कर हो गए। ज्यादातर स्थानीय लोगों को मौलाना की गिरफ्तारी का पता नहीं था। जिनको पता भी था वह खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं थे। वहीं, मौलाना उमर के परिवार ने इस मामले में मीडिया के सामने प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया।
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मौलाना उमर गौतम के करीबी मोहम्मद आरिफ कासमी ने बताया कि मूलरूप से यूपी के फतेहपुर के रहने वाले उमर गौतम का जन्म उनके पैतृक गांव में हिंदू परिवार में हुआ था। इनके पिता धनराज सिंह गौतम गांव में ही रहते थे। उमर गौतम ने जामिया मिल्लिया से इस्लामिक स्टडीज में एमए किया था। इस्लाम की किताबें पढ़ते-पढ़ते वर्ष 1984 में इस्लाम धर्म अपना लिया। इसके बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया में इस्लामिक स्टडीज विभाग में लेक्चरर बन गए।
उमर गौतम का परिवार फिलहाल के-47, खलीलउल्लाह मस्जिद के पास, बटला हाउस में चौथी मंजिल पर रह रहा है। परिवार में पत्नी रजिया बेगम के अलावा बड़ी बेटी फातिमा तकदीस और दो बेटे मोहम्मद आदिल व मो. अब्दुल्लाह हैं। फातिमा जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी में लेक्चरर हैं। वर्ष 1994 में उमर ने जामिया से नौकरी छोड़ दी। वह मरकाजुल मारीफ (मुस्लिम उलेमा की संस्था) के निदेशक बन गए। वर्ष 2010 तक उमर ने इस संस्था के साथ जुड़कर काम किया। 2010 में इस्लामिक दावाह सेंटर के नाम से अपनी संस्था खोल ली। इस संस्था का उद्देश्य इस्लाम धर्म का प्रचार करना था। संस्था ने बटला हाउस के जोगाबाई में नूह मस्जिद के पास दफ्तर भी खोला हुआ है। वहां से सारे काम चलते हैं।
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दूसरे आरोपी मौलाना जहांगीर आलम कासमी परिवार के साथ 23/1, जोगाबाई, बटला हाउस चौक के पास चौथी मंजिल पर रहते हैं। परिवार में पत्नी के अलावा चार बेटे व एक बेटी हैं। लॉकडाउन से पहले तक मौलाना शाहीन बाग स्थित जायद कॉलेज में बच्चों को इस्लाम की शिक्षा देते थे, लेकिन पिछले साल से कॉलेज बंद है। वह मौलाना उमर की संस्था से भी जुड़े हैं। इनके करीबियों ने मौलाना जहांगीर के जबरन इस्लाम कबूल करवाने और विदेशी लिंक होने की बात से साफ इंकार किया है।
पूछताछ के बहाने बुलाया था गाजियाबाद के मसूरी थाने
यूपी पुलिस ने क शनिवार को उमर गौतम से संपर्क कर उनको यूपी के गाजियाबाद स्थित मसूरी थाने में पूछताछ के लिए बुलाया था। वह अपने साथी अंजुम अंसारी के साथ वहां पहुंचे थे। उनसे पूछताछ के बाद मौलाना जहांगीर आलम कासमी को भी बुलाया गया। बाद में यूपी पुलिस दोनों को लेकर रवाना हो गई। अंजुम अंसारी ने घर आकर गौतम के पुलिस कस्टडी में होने की खबर दी। सोमवार को पुलिस ने दोनों की गिरफ्तारी का खुलासा कर दिया। उमर के परिजनों ने मीडिया से बातचीत से साफ इंकार कर दिया। उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन ही बंद कर लिया।
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